डॉ. कलाम मानते थे कि देश को विकसित बनाने के लिए हर व्यक्ति को अपने कदम खुद ही बढ़ाने होंगे। ऐसे में उन्होंने योग्य व प्रतिभाशाली व्यक्तियों को इस बात का अहसास दिलाया कि वे अपने मस्तिष्क में आने वाले नए व उपयोगी सुझावों से सबको अवगत कराएं। वे स्वयं भी नई खोजें व सुझाव तलाश रहे थे। एक बार डॉ. कलाम बोले, ‘रोजगार के अवसर पैदा करने के लिए हमें देश में जट्रोफा के पेड़ लगाने चाहिए।’ सभी विद्वजन एक-दूसरे की ओर देखने लगे। डॉ. कलाम मुस्कराते हुए बोले, ‘हां हमंे ज्यादा से ज्यादा जट्रोफा के पेड़ लगाने चाहिए। दरअसल जट्रोफा एक ऐसा पेड़ है जिसे बंजर भूमि में भी उगाया जा सकता है। यह पेड़ एक बार उग जाने पर पचास साल तक जीवित रहता है। हर साल इसमें फल आता है। इसके फल के बीज से तेल प्राप्त होता है जो डीजल में मिलाया जाता है।’ वहां उपस्थित सभी लोग डॉ. कलाम की कुशाग्र बुद्धि के आगे नतमस्तक हो गए। सभी राज्याें ने इसे एक अभियान की तरह स्वीकार किया और लाखों हेक्टेयर ज़मीन में यह पेड़ रोपे गए। इसके बाद भारत के विशेषज्ञों ने अफ्रीका के देशों में इस पेड़ की विधि समझाई और फिर हमारे किसानों के साथ मिलकर उन्होंने यह फसल विकसित की, जिससे कि इसके माध्यम से जैविक ईंधन प्राप्त किया जा सके।
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