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Paush Purnima : 21.50 लाख श्रद्धालुओं ने लगाई संगम में डुबकी, एक माह का कल्पवास शुरू

कड़ाके की ठंड पड़ने के कारण सुबह स्नानार्थियों की भीड़ थोड़ी कम थी

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Paush Purnima : पौष पूर्णिमा स्नान के साथ शनिवार से संगम की रेती पर माघ मेला प्रारंभ हो गया। बच्चे, बूढ़े, महिलाएं और युवा सुबह से ही गंगा और संगम की ओर जाते दिखाई दिए। शाम चार बजे तक लगभग 21.50 लाख श्रद्धालुओं ने गंगा और संगम में डुबकी लगाई।

प्रयागराज मेला प्राधिकरण के एक अधिकारी ने बताया कि माघ मेले के प्रथम स्नान पौष पूर्णिमा पर शनिवार शाम 4 बजे तक 21.50 लाख श्रद्धालुओं ने गंगा और संगम में डुबकी लगाई। इस स्नान पर्व के साथ एक माह का कल्पवास भी आज से शुरू हो गया। त्रिवेणी संगम आरती सेवा समिति के अध्यक्ष आचार्य राजेंद्र मिश्र ने बताया कि माघ मेले में करीब पांच लाख कल्पवासियों का आज से कल्पवास प्रारंभ हो जाएगा, जिसके तहत वे दिन में दो बार गंगा स्नान और एक पहर भोजन लेते हैं। बाकी समय अपने आराध्य देवता का ध्यान, पूजन आदि करते हैं। कड़ाके की ठंड पड़ने के कारण सुबह स्नानार्थियों की भीड़ थोड़ी कम थी, लेकिन दिन निकलने के साथ उनकी संख्या तेजी से बढ़ी।

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पौष पूर्णिमा स्नान के लिए दिनभर लोग आते रहे। मेला प्रशासन के मुताबिक सुबह 10 बजे तक नौ लाख श्रद्धालुओं ने गंगा और संगम में स्नान किया था। प्रयाग धाम संघ के अध्यक्ष राजेंद्र पालीवाल ने बताया कि सुबह से ही कोहरा होने के कारण श्रद्धालुओं की संख्या बहुत अधिक नहीं थी, लेकिन यदि कल्पवासियों की संख्या को जोड़ दें तो शाम तक 20 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने पौष पूर्णिमा का स्नान किया।

आज शाम चार बजे तक पौष पूर्णिमा स्नान मुहूर्त था। वहीं, कल्पवासियों ने आज स्नान करने के बाद अपने पुरोहित से एक माह के कल्पवास का संकल्प लिया और उसी के अनुसार वे यहां मेले में प्रवास करेंगे। प्रयागराज की मंडलायुक्त सौम्या अग्रवाल ने पौष पूर्णिमा पर 20 से 30 लाख श्रद्धालुओं के गंगा और संगम में स्नान करने की उम्मीद जताई थी। माघ मेले में 10,000 फुट क्षेत्र के 10 स्नान घाट बनाए गए हैं और नौ पांटून पुल बनाए गए हैं। कोलकाता से सपरिवार स्नान करने आईं पूजा झा ने कहा कि माघ मेला में आकर बहुत अच्छा लग रहा है।

स्नान का पहला दिन होने के कारण भीड़ थोड़ी कम है। हालांकि भीड़ कम होने से लोग आराम से स्नान कर रहे हैं। मध्यप्रदेश के रीवा से लड्डू गोपाल को लेकर आईं शिवानी मिश्रा ने कहा कि वह महाकुंभ में तीन बार स्नान करने आई थीं और माघ मेले में भीड़ कम होने से अच्छे से स्नान हुआ। एडीएम (माघ मेला) दयानंद प्रसाद ने बताया कि पहली बार माघ मेला क्षेत्र में कल्पवासियों के लिए एक अलग से नगर बसाया गया है।

950 बीघे में बसाए गए इस नगर को प्रयागवाल नाम दिया गया है। नागवासुकी मंदिर के सामने गंगा नदी के पार इसे बसाया गया है। माघ मेला 2026 के प्रमुख स्नान पर्वों में पौष पूर्णिमा (तीन जनवरी), मकर संक्रांति (14 जनवरी), मौनी अमावस्या (18 जनवरी), बसंत पंचमी (23 जनवरी), माघी पूर्णिमा (एक फरवरी) और महाशिवरात्रि (15 फरवरी) शामिल हैं।

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