एकदा

गृहस्थी का सौंदर्य

एकदा

एक गृहस्थ ने विचार किया कि सर्वोत्तम सौन्दर्य कहां है। सर्वोत्तम सौन्दर्य की खोज में वह एक संत के पास गया। संत ने श्रद्धा में सर्वोत्तम सौन्दर्य बताया। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि श्रद्धा पत्थर में से भी ईश्वर को प्रकट कर देती है। एक भक्त से पूछने पर ज्ञात हुआ कि प्रेम में सर्वश्रेष्ठ सौन्दर्य छिपा है। भक्त के अनुसार अनन्य प्रेम के कारण ही सांवले कृष्ण गोपियों के प्राणाधार थे। वह थोड़ा आगे बढ़ा। मार्ग में सैनिक आता हुआ दिखाई दिया। सैनिक ने शांति को सबसे सुन्दर बताया। किन्तु गृहस्थ के मन की जिज्ञासा शांत न हुई। उसे घर से निकले दो दिन बीत चुके थे। उसे घर-परिवार की याद सताने लगी। निराश गृहस्थ घर लौट आया। दो दिन से घर के सभी सदस्य दु:खी हो रहे थे। उसे देखकर सभी प्रसन्न हो गए। गृहस्थ सोचने लगा कि मैं व्यर्थ ही सर्वोत्तम सौन्दर्य की खोज में घर छोड़कर गया। श्रद्धा, प्रेम तथा शांति के रूप में यह तो घर में ही उपस्थित है। प्रस्तुति : सुधीर सक्सेना ‘सुधि’

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