अब्दुल कलाम जब भारत के राष्ट्रपति थे, तब एक बार किसी कार्यक्रम में उन्हें मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित किया गया। कार्यक्रम समाप्त होने के बाद वे मंच से नीचे उतरे तो उन्होंने देखा कि वहां एक साधारण कर्मचारी चुपचाप कुर्सियां समेट रहा था। डॉ. कलाम सीधे उसके पास गए, मुस्कुराए और बोले, ‘आपका बहुत धन्यवाद, आपने इतनी व्यवस्था संभाली।’ वह कर्मचारी आश्चर्यचकित रह गया, क्योंकि उसने कभी सोचा भी नहीं था कि देश का राष्ट्रपति उसे इस तरह सम्मान देगा। उसकी आंखों में खुशी और आत्मसम्मान साफ झलक रहा था। यह देखकर वहां उपस्थित अन्य लोग भी प्रभावित हुए। डॉ. कलाम ने फिर सबको संबोधित करते हुए कहा कि किसी भी व्यक्ति का कार्य छोटा या बड़ा नहीं होता, हर व्यक्ति सम्मान का अधिकारी है। उस दिन के बाद उस कर्मचारी ने अपने काम को और भी लगन से करना शुरू कर दिया, क्योंकि उसे पहली बार अपने कार्य का सम्मान महसूस हुआ था।
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