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जीवन की सार्थकता

एकदा

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एक बार दो गांवों के बीच पानी को लेकर विवाद छिड़ गया। झगड़ा इतना बढ़ गया कि दोनों ओर से तलवारें खिंच गई। सौभाग्य से तभी वहां एक संत का आगमन हुआ। लोगों को झगड़ते देख उन्होंने पूछा, ‘आप लोग आपस में क्यों झगड़ रहे हो?’ लोगों ने बताया, ‘पानी के लिए।’ संत ने पूछा, ‘पानी का क्या मूल्य है?’ जवाब मिला, ‘कुछ भी नहीं।’ संत ने अगला सवाल किया, ‘क्या वह बिना मूल्य मिल सकता है?’ गांव वालों ने कहा, ‘पानी बिना मूल्य ही हर जगह मिलता है।’ तब संत ने पूछा, ‘मनुष्य के जीवन का क्या मूल्य है?’ दोनों ओर से उत्तर मिला, ‘वह तो आंका ही नहीं जा सकता। जीवन तो अनमोल है।’ संत ने कहा, ‘तब क्या वह अनमोल जीवन साधारण पानी के लिए नष्ट करना उचित है?’ संत की दलील सुनकर सभी चुप हो गए। तब संत ने कहा, ‘शत्रुओं में अशत्रु होकर जीना की सबसे बड़ा कौशल है। वैर को अवैर से जीतो।

प्रस्तुति : अक्षिता तिवारी

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