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Mauni Amavasya 2026: मौनी अमावस्या आज, जानें इसका धार्मिक महत्व और शिव पूजा का विधान

Mauni Amavasya 2026: मौनी अमावस्या पर गंगा नदी में स्नान माना गया है उत्तम

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फाइल फोटो
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Mauni Amavasya 2026: आज मौनी अमावस्या है। हिंदू धर्म में गंगा नदी को सर्वाधिक पवित्र माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मौनी अमावस्या के दिन गंगा का जल अमृतमय हो जाता है। मान्यता है कि इस दिन गंगा स्नान करने से व्यक्ति के जाने-अनजाने में किए गए पाप नष्ट हो जाते हैं। यही कारण है कि देशभर से श्रद्धालु इस पावन तिथि पर गंगा तटों पर स्नान और दान के लिए एकत्रित होते हैं।

पंडित अनिल शास्त्री के अनुसार कई साधक केवल मौनी अमावस्या ही नहीं, बल्कि पूरे माघ माह तक प्रतिदिन गंगा स्नान का संकल्प लेते हैं। यह अनुष्ठान पौष पूर्णिमा से आरंभ होकर माघ पूर्णिमा तक चलता है। शास्त्रों के अनुसार, इस अवधि में किया गया स्नान, दान और तप कई गुना पुण्य फल प्रदान करता है।

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माघ मास की अमावस्या को मौनी अमावस्या कहा जाता है। इस दिन मौन रहकर स्नान, दान और जप-तप करने का विशेष महत्व है। मान्यता है कि मौन व्रत से मन और इंद्रियों पर नियंत्रण बढ़ता है तथा साधक को आत्मिक शांति प्राप्त होती है। साथ ही, इस दिन भगवान शिव की पूजा करना अत्यंत फलदायी माना गया है।

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मौनी अमावस्या पर शिवलिंग पर क्या अर्पित करें

मौनी अमावस्या के दिन प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें और भगवान शिव की विधि-विधान से पूजा करें। शिवलिंग पर आक के पत्ते और फूल अर्पित करना विशेष शुभ माना जाता है, क्योंकि ये भगवान शिव को अत्यंत प्रिय हैं। इसके साथ ही अपामार्ग के पत्ते चढ़ाने से सुख-समृद्धि और सौभाग्य में वृद्धि होती है।

शमी के पत्ते भी शिव पूजा में महत्वपूर्ण माने गए हैं। इन्हें अर्पित करने से जीवन के कष्ट दूर होते हैं। इसके अलावा, बेलपत्र भगवान शिव को सबसे प्रिय हैं। मौनी अमावस्या पर बेलपत्र और जल अर्पित करने से आर्थिक बाधाएं दूर हो सकती हैं।

यदि उपलब्ध हों तो धतूरा, भांग भी शिवलिंग पर अर्पित किए जा सकते हैं। अंत में शिवलिंग का पंचामृत से अभिषेक करें—जिसमें जल, दूध, दही, घी, शक्कर या गुड़ और गंगाजल शामिल हों। ऐसा करने से पापों का नाश होता है और मन को शांति व सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है।

यह भी पढ़ें: मौन की साधना से पुण्य की प्राप्ति

Panchang 18 January 2026:

राष्ट्रीय तिथि पौष 29

शक संवत 1947

विक्रम संवत् 2082

तिथि अमावस्या

वार रविवार

अंग्रेजी तिथि 18 जनवरी 2026 ई.

सौर मास माघ मास

सौर माघ मास प्रविष्टि 05

सूर्य स्थिति उत्तरायण

गोल दक्षिण गोल

ऋतु शिशिर

विशेष पर्व मौनी अमावस्या

राहुकाल सायं 04:30 से 06:00 बजे तक

विजय मुहूर्त दोपहर 02:06 से 02:49 बजे तक

निशीथ काल रात्रि 11:52 से 12:46 बजे तक

गोधूलि बेला सायं 05:38 से 06:04 बजे तक

अमावस्या तिथि रात्रि 01:22 बजे तक

प्रतिपदा तिथि आरंभ रात्रि 01:22 बजे के बाद

पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र प्रातः 10:14 बजे तक

उत्तराषाढ़ा नक्षत्र प्रातः 10:14 बजे के बाद

हर्षण योग रात्रि 09:11 बजे तक

वज्र योग रात्रि 09:11 बजे के बाद

चतुष्पाद करण दोपहर 12:16 बजे तक

किंस्तुघ्न करण दोपहर 12:16 बजे के बाद

धनु राशि सायं 04:41 बजे तक

मकर राशि सायं 04:41 बजे के बाद

डिस्कलेमर: यह लेख धार्मिक आस्था व सामाजिक मान्यता पर आधारित है। dainiktribuneonline.com इसकी पुष्टि नहीं करता। जानकारी के लिए विशेषज्ञ की सलाह लें।

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