एक बार प्रधानमंत्री लालबहादुर शास्त्री कपड़े की दुकान में साड़ियां खरीदने गए। दुकान का मैनेजर शास्त्री जी को कीमती साडि़यां साड़ियां दिखाने लगा। शास्त्री जी बोले, भाई, मुझे कम कीमत वाली साड़ियां दिखाओ और उनकी कीमत बताते जाओ। तब मैनेजर ने शास्त्री जी को थोड़ी सस्ती साड़ियां दिखानी शुरू कीं। शास्त्री जी ने कहा, ये भी मेरे लिए महंगी ही हैं और कम कीमत की दिखाओ। उन्होंने कहा, दुकान में जो सबसे सस्ती साड़ियां हों, वह दिखाओ। मुझे वही चाहिए। आखिरकार मैनेजर ने उनके मनमुताबिक साड़ियां निकालीं। शास्त्री जी ने उनमें से कुछ चुन लीं और उनकी कीमत अदा कर चले गए। उनके जाने के बाद बड़ी देर तक दुकान के कर्मचारी और वहां मौजूद कुछ ग्राहक शास्त्री जी की सादगी के प्रति श्रद्धा से भर उठे थे।
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