Tribune
PT
Subscribe To Print Edition About the Dainik Tribune Code Of Ethics Advertise with us Classifieds Download App
Add Tribune As Your Trusted Source
search-icon-img
Advertisement

उजाले के दीप

एकदा

  • fb
  • twitter
  • whatsapp
  • whatsapp
Advertisement

गुजरात के कांति और शांतिशाह जुड़वां भाई थे। दोनों की दृष्टि कमजोर थी। किशोरवय में दोनों भाइयों की नेत्रज्योति जाती रही। उनके बड़े सहोदर ने दोनों को वडोदरा स्थित नेत्रहीनों के स्कूल में ब्रेल लिपि सीखने की सलाह दी। उसके बाद वे दोनों बंबई के वर्ली इलाके में स्थित डुग्गन ब्रेल प्रेस के अहाते में रहने लगे। पहले उन्होंने ब्रेल पुस्तकों का एक चल पुस्तकालय स्थापित किया, उसके बाद सन‍् 1947 में उन्होंने ‘दीपक’ नाम से एक ब्रेल पत्र का प्रकाशन शुरू किया। वे ऐसे पहले प्रकाशक थे जिन्होंने भारत के नेत्रहीनों के लिए ब्रेल पत्र छापने का काम किया। उनके मिशन से प्रभावित होकर न्यूयार्क की एक धर्मार्थ फाउंडेशन ने उन्हें एक डुप्लीकेटर भेंट किया। फिर ‘दीपक’ गुजराती के साथ हिंदी में भी निकलने लगा। उन्होंने अनेक पुस्तकों का ब्रेल में रूपांतरण किया। सन‍् 1958 में उन्होंने ब्रेल प्रेस एसोसिएशन की स्थापना की, जिसमें सारा काम नेत्रहीन ही करते थे। नेत्रहीनों में साहित्य व शिक्षा के प्रसार हेतु उनको अनेक सम्मानों से विभूषित किया गया। उनके काम पर एक फिल्म भी दूरदर्शन पर प्रसारित की गई। दोनों भाइयों ने यह सिद्ध कर दिया कि नेत्रहीन जीवन अंधकारमय नहीं होता। वे कहा करते कि संकल्प और परिश्रम ऐसे दीये हैं, जो निराशा के अंधेरे को दूर कर उजाले का मार्ग प्रशस्त करते हैं।

Advertisement
Advertisement
×