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जब चारों ओर था अंधेरा, तभी कंस की कैद में जन्मे थे श्रीकृष्ण; आधी रात को ही धरती पर क्यों आए थे भगवान?

आधी रात को ही क्यों हुआ था कान्हा का जन्म?

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Krishna Janmashtami : हिंदू धर्म में भगवान श्रीकृष्ण का जन्म सिर्फ एक धार्मिक घटना नहीं, बल्कि अधर्म पर धर्म और अंधकार पर प्रकाश की जीत का प्रतीक माना जाता है। हर साल जन्माष्टमी पर भक्त आधी रात को कान्हा के जन्म का उत्सव मनाते हैं। क्या आपने कभी सोचा है कि आखिर श्रीकृष्ण का जन्म आधी रात में ही क्यों हुआ था? इसके पीछे धार्मिक और आध्यात्मिक दोनों ही मान्यताएं जुड़ी हैं।

मथुरा की जेल में हुआ था कान्हा का जन्म

पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान कृष्ण का जन्म मथुरा की उस कारागार में हुआ था, जहां उनके माता-पिता देवकी और वसुदेव को कंस ने कैद कर रखा था। कंस को भविष्यवाणी मिली थी कि देवकी का आठवां पुत्र उसका वध करेगा।

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इसी डर के कारण उसने देवकी के सभी पुत्रों को मार डाला था। जब श्रीकृष्ण का जन्म हुआ, तब चारों ओर घना अंधकार था और रात का समय था। मान्यता है कि इसी समय भगवान विष्णु ने कृष्ण रूप में अवतार लिया।

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आधी रात का जन्म क्यों माना जाता है खास?

धार्मिक मान्यताओं में आधी रात को अंधकार और अज्ञान का प्रतीक माना जाता है। ऐसे समय भगवान कृष्ण का जन्म इस बात का संदेश देता है कि जब बुराई अपने चरम पर पहुंचती है, तब सत्य और धर्म का प्रकाश उसे समाप्त करने के लिए प्रकट होता है। यानी कान्हा का जन्म सिर्फ समय की एक घटना नहीं, बल्कि अंधकार पर प्रकाश और अधर्म पर धर्म की विजय का प्रतीक माना जाता है।

कंस से बचाने के लिए जरूरी थी गोपनीयता

एक अन्य मान्यता के अनुसार, आधी रात का समय कृष्ण जन्म के लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण था क्योंकि कंस से उन्हें बचाना था। जन्म के बाद वसुदेव उन्हें गोकुल लेकर गए। कहा जाता है कि उस समय कारागार के द्वार अपने आप खुल गए और पहरेदार गहरी नींद में सो गए।

आध्यात्मिक संदेश भी है जुड़ा

श्रीकृष्ण का मध्यरात्रि में जन्म यह संदेश देता है कि जीवन में चाहे कितनी भी परेशानियां और अंधकार क्यों न हों, सत्य और विश्वास का प्रकाश रास्ता जरूर दिखाता है। यही वजह है कि जन्माष्टमी की रात भक्त आधी रात को शंख-घंटियों और जयकारों के साथ लड्डू गोपाल के जन्म का स्वागत करते हैं।

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