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Janmashtami Special : जब मिट गई लोक-लाज की सीमा... भगवान श्रीकृष्ण के लिए राधा ने क्योंं भेजी थी पैरोंं की धूल? जानिए पौराणिक कथा

राधा के प्रेम की ये कहानी है बेहद खास

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Janmashtami Special : भगवान श्रीकृष्ण और राधा के प्रेम से जुड़ी कई कथाएं आज भी भक्तों के बीच बेहद लोकप्रिय हैं। ऐसी ही एक प्रचलित कथा निस्वार्थ प्रेम और समर्पण की मिसाल पेश करती है। इसमें बताया जाता है कि जब श्रीकृष्ण तेज सिरदर्द से परेशान हुए, तो राधा ने बिना किसी संकोच के ऐसा कदम उठाया, जिसे सुनकर हर कोई हैरान रह गया।

उत्सव के बीच उदास थे श्रीकृष्ण

पौराणिक कथाओं के अनुसार, श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव पर भव्य आयोजन किया गया था। चारों ओर उत्सव का माहौल था, लेकिन श्रीकृष्ण स्वयं इसमें शामिल नहीं हुए। माता रुक्मिणी ने जब इसका कारण पूछा तो उन्होंने बताया कि उनके सिर में बहुत तेज दर्द है। कहा जाता है कि श्रीकृष्ण ने बताया कि उनके सच्चे प्रेमी की चरण-रज यानी पैरों की धूल उनके सिर पर लगाने से दर्द ठीक हो सकता है।

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रुक्मिणी-सत्यभामा ने कर दिया इनकार

यह सुनकर रुक्मिणी और सत्यभामा असमंजस में पड़ गईं। वे श्रीकृष्ण से प्रेम करती थीं, लेकिन भगवान के सिर पर अपने पैरों की धूल लगाना उन्हें पाप जैसा लगा। देवर्षि नारद ने यह सुनकर मना कर दिया। उन्हें डर था कि भगवान के मस्तक पर चरणों की धूल रखने से उन्हें घोर पाप लगेगा और नरक जाना पड़ेगा।

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राधा ने नहीं सोचा अपने परिणाम के बारे में

मगर जब ब्रज में गोपियों और राधा रानी को इस बात का पता चला तो उन्होंंने श्रीकृष्ण की पीड़ा को सबसे ऊपर रखा। कथा के अनुसार, राधा ने अपनी साड़ी का पल्लू जमीन पर बिछाकर गोपियों से उस पर चलने को कहा, ताकि उनकी चरण-रज कपड़े पर लग जाए। फिर अपनी व गोपियों के चरणों की धूल भरा कपड़ा नारद मुनि के जरिए श्रीकृष्ण तक पहुंचाया। कहा जाता है कि इसे सिर पर रखते ही श्रीकृष्ण का दर्द दूर हो गया। राधा रानी को पाप या नरक का कोई भय नहीं था। उनके लिए सबसे जरूरी श्रीकृष्ण का कष्ट दूर करना था।

डिस्केलमनर: यह लेख/खबर धार्मिक व सामाजिक मान्यता पर आधारित है। dainiktribneonline.com इस तरह की बात की पुष्टि नहीं करता है।

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