एक सूफी संत से कुछ लोगों ने पूछा कि जन्नत (स्वर्ग) और दोज़ख़ (नरक) क्या है। सूफी संत उन्हें अगले दिन एक शिकारी के पास ले गए। वह शिकारी बहुत से जानवरों का शिकार कर उन्हें मार चुका था। सूफी संत ने कहा, ‘यह दोज़ख़ का मंजर है। उसके लिए इस दुनिया में भी दोज़ख़ है और मरने के बाद भी।’ इसके बाद वे एक फ़क़ीर के पास गए, जो जंगल में कुटिया बनाकर रहता था। वह सुकून और आनंद से भरा हुआ था। सूफी संत ने कहा, ‘इस फ़क़ीर ने आने वाले सुख के लिए आज के सुख का त्याग किया है, इसे जन्नत मिलना निश्चित है।’ अंत में वे एक साधारण व्यक्ति के घर में गए, जहां आपसी प्रेम, मेहनत, दान और सादगी थी। सूफी संत ने बताया कि ऐसे लोगों के लिए यहां भी जन्नत है और वहां भी जन्नत।
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