Tribune
PT
Subscribe To Print Edition About the Dainik Tribune Code Of Ethics Advertise with us Classifieds Download App
Add Tribune As Your Trusted Source
search-icon-img
Advertisement

Ganesh Chaturthi 2026 : चंद्रमा पर क्यों क्रोधित हुए गणेश जी? श्राप से जुड़ी है 'कलंक चतुर्थी' की कहानी, श्रीकृष्ण को भी लगा था दोष

गणेश चतुर्थी को क्यों कहते हैं कलंक चौथ? जानें चंद्रमा से जुड़ी रोचक कथा

  • fb
  • twitter
  • whatsapp
  • whatsapp
Advertisement

Ganesh Chaturthi 2026 :  गणेश चतुर्थी सिर्फ भगवान गणेश की पूजा का पर्व नहीं, बल्कि इससे जुड़ी कई ऐसी मान्यताएं भी हैं, जिनका उल्लेख धार्मिक ग्रंथों और लोक परंपराओं में मिलता है। भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को कलंक चतुर्थी, पत्थर चौथ और ढेला चौथ जैसे नामों से भी जाना जाता है। मान्यता है कि इस दिन चंद्रमा के दर्शन करने से व्यक्ति पर झूठा कलंक लग सकता है।

चंद्रमा को देखने से क्यों लगता है कलंक?

पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार भगवान गणेश बहुत सारे मोदक खाकर अपने वाहन मूषक पर सवार होकर लौट रहे थे। रास्ते में सांप को देखकर मूषक घबरा गया और गणेश जी का संतुलन बिगड़ गया। वे जमीन पर गिर पड़े। यह देखकर चंद्रदेव हंसने लगे और गणेश जी के स्वरूप का उपहास किया।

Advertisement

चंद्रमा के इस अहंकार से नाराज होकर गणेश जी ने उन्हें श्राप दिया कि भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी के दिन जो भी व्यक्ति चंद्रमा को देखेगा, उसे झूठे आरोप या अपयश का सामना करना पड़ सकता है। बाद में चंद्रदेव के क्षमा मांगने पर श्राप को सीमित कर दिया गया।

Advertisement

ऐसे पड़ा ‘कलंक चतुर्थी- पत्थर चौथ’ नाम

लोक मान्यता में इस तिथि को ‘पत्थर चौथ’ कहे जाने की एक दिलचस्प वजह भी बताई जाती है। पुराने समय में अगर कोई व्यक्ति गलती से गणेश चतुर्थी की रात चंद्रमा देख लेता था, तो वह झूठे कलंक से बचने के लिए किसी के घर की ओर पत्थर या ढेला फेंक देता था। इसी लोक परंपरा के कारण इसे पत्थर चौथ या ढेला चौथ कहा जाने लगा।

श्रीकृष्ण पर भी लगा था झूठा आरोप

चंद्र दर्शन से जुड़े इस दोष का सबसे प्रसिद्ध उदाहरण भगवान श्रीकृष्ण से जुड़ा है। मान्यता है कि द्वापर युग में श्रीकृष्ण ने अनजाने में गणेश चतुर्थी का चंद्रमा देख लिया था। इसके बाद उन पर स्यमंतक मणि चोरी करने का झूठा आरोप लगा। बाद में उन्होंने इस कलंक को दूर किया।

धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दोष की शांति के लिए स्यमंतक मणि की कथा सुनने और मंत्र का जाप करने का विधान बताया गया है—

“सिंहः प्रसेनमवधीत् सिंहो जाम्बवता हतः।

सुकुमारक मा रोदीस्तव ह्येष स्यमन्तकः।।’’

मान्यता यह भी है कि चंद्रमा मन का कारक है। इसलिए इस दिन चंद्र दर्शन को लेकर धार्मिक सावधानी बरतने की परंपरा चली आ रही है।

डिस्केलमनर: यह लेख/खबर धार्मिक व सामाजिक मान्यता पर आधारित है। dainiktribneonline.com इस तरह की बात की पुष्टि नहीं करता है।

Advertisement
×