एकदा

पांच माताएं

पांच माताएं

आचार्य चाणक्य अपनी माता का अत्यधिक सम्मान करते थे और अपने राष्ट्र से भी वे उतना ही प्रेम करते थे। एक बार किसी ने चाणक्य से पूछा, ‘आचार्य! आप जितना प्रेम अपनी माता को करते हैं, क्या उतना ही प्रेम भारत माता से भी करते हैं? क्या किसी और को भी ऐसा ही आदर और प्रेम देते हैं?’ आचार्य चाणक्य ने उत्तर दिया, ‘संसार में पांच मां होती हैं; राजा की पत्नी, गुरु की पत्नी, मित्र की पत्नी, राष्ट्रमाता और जन्म देने वाली माता। ये पांचों माताएं प्रत्येक मनुष्य के लिए सदा पूजनीय हैं और मैं इन सभी के प्रति श्रद्धा रखता हूं।’

प्रस्तुति : योगेन्द्र नाथ शर्मा ‘अरुण’

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