व्रत-पर्व

व्रत-पर्व

2 मई - कोकिला षष्ठी व्रत (बंगाल), बेताल षष्ठी (ज.क.)

3 मई - गुरु अरजन देव जयंती

4 मई - श्री शीतलाष्टमी व्रत, कालाष्टमी, शहादते-हजरत अली (मु.)

7 मई - वरुथिनी एकादशी व्रत, श्री वल्लभाचार्य जयंती, जुमा-अलविदा (मु.), श्री वल्लाभाचार्य जयंती, रविन्द्रनाथ टैगोर जयंती

8 मई - शनि प्रदोष व्रत

— सत्यव्रत बेंजवाल

धर्म वाक्य

प्रियवाक्य प्रदानेन सर्वे तुष्यन्ति जन्तवः।

तस्मात तदैव वक्तव्यम वचने का दरिद्रता।।

प्रिय वाक्य बोलने से सभी जीव संतुष्ट हो जाते हैं, अतः प्रिय वचन ही बोलने चाहिए। ऐसे वचन बोलने में कंजूसी कैसी।

प्रियो भवति दानेन प्रियवादेन चापरः।

मन्त्रमूलबलेनान्यो यः प्रियः प्रिय एव सः ॥

कोई पुरुष दान देकर प्रिय होता है, कोई मीठा बोलकर प्रिय होता है, कोई अपनी बुद्धिमानी से प्रिय होता है; लेकिन जो वास्तव में प्रिय होता है, वह बिना प्रयास के प्रिय होता है।

बुद्धयो भयं प्रणुदति तपसा विन्दते महत‍्।

गुरुशुश्रूषया ज्ञानं शान्तिं योगेन विन्दति ॥

ज्ञान द्वारा मनुष्य का डर दूर होता है, तप द्वारा उसे ऊंचा पद मिलता है, गुरु की सेवा द्वारा विद्या प्राप्त होती है तथा योग द्वारा शांति प्राप्त होती है।

प्रदोषे दीपक: चन्द्र:, प्रभाते दीपक: रवि:।

त्रैलोक्ये दीपक: धर्म:, सुपुत्र: कुलदीपक:।।

संध्या-काल मे चंद्रमा दीपक है, प्रातः काल में सूर्य दीपक है, तीनों लोकों में धर्म दीपक है और सुपुत्र कुल का दीपक है।

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