महारानी अहिल्याबाई अत्यंत धार्मिक तथा परोपकारी प्रवृत्ति की थीं। एक दिन उन्होंने अपने कोष से तमाम धन पर तुलसी दल चढ़ाया तथा भगवान को समर्पित कर दिया। उन्होंने घोषणा की, ‘अब यह तमाम धन गरीबों की सेवा, सहायता तथा धर्म के कार्यों पर खर्च होगा।’ राघोबा ने पेशवा गंगाधरराव से सांठगांठ कर अहिल्याबाई से धन की मांग की। रानी ने उत्तर दिया, ‘अब यह तमाम धन भगवान को समर्पित किया जा चुका है। इसे किसी को न देकर प्रजा के हित में खर्च किया जाएगा।’ इस जवाब से चिड़कर राघोबा ने इंदौर पर हमला बोल दिया। अहिल्याबाई पांच सौ महिलाओं को सैनिक वेश में साथ लेकर युद्ध क्षेत्र में जा पहुंची। राघोबा तथा उसके सैनिकों ने जब महिलाओं के हाथों में तलवारें देखीं तो उन्हें पसीना आ गया। राघोबा ने घोषणा की, ‘जिस राज्य की युवतियों ने चंडी का रूप धारण कर लिया है उनके सामने हम पुरुष शस्त्र नहीं चला पाएंगे।’ और राघोबा को अपनी सेना सहित वहां से भागना पड़ा।
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