अमर शहीद सुखदेव की पार्टी का नाम ‘विलेजर’ था। वे अपने हठ के लिए मशहूर थे। एक बार आगरा में उन्होंने अपनी सहनशक्ति की परीक्षा लेने का संकल्प लिया। विद्यार्थी जीवन में उन्होंने अपने बाएं हाथ पर 'ओउम' और अपना नाम गुदवा लिया था। फरारी के दिनों में यह एक महत्वपूर्ण पहचान बन गई थी। आगरा में बम बनाने के लिए पार्टी ने कुछ नाइट्रिक एसिड खरीदा हुआ था। किसी मित्र को बताये बिना सुखदेव ने बहुत-सा एसिड 'ओउम' और अपने नाम पर डाल दिया। शाम तक जहां एसिड लगा था, वहां गहरे घाव हो गए और पूरा हाथ सूज गया। तीव्र बुखार भी चढ़ गया। इसके बावजूद उन्होंने अपनी पीड़ा का किसी से जिक्र नहीं किया। असहनीय दर्द होते हुए भी उन्होंने उफ तक नहीं किया। तीसरे दिन जब उन्होंने नहाने के लिए कमीज उतारी, तो भगत सिंह और चन्द्रशेखर आजाद उनके जख्म देखकर बहुत नाराज हुए। उनकी नाराजगी पर सुखदेव ने हंसते-हंसते कहा, 'शिनाख्त भी मिट जाएगी और एसिड में कितनी जलन होती है, इसका भी पता चल जाएगा।' इसके बाद सुखदेव चार-पांच दिन आगरा में रहे। सभी साथियों ने उनसे दवा, मलहम, पट्टी आदि कराने का आग्रह किया, पर उन्होंने किसी की एक न सुनी। वह बदस्तूर अपना काम करते रहे और उसी हालत में अगले मिशन के लिए लाहौर चले गए।
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