एक राजा का मंत्री प्रतिदिन मंत्र-जप करता था। एक दिन राजा ने पूछा— ‘क्या मंत्र-जप सबके लिए समान रूप से लाभदायक होता है?’ मंत्री ने उत्तर दिया—‘नहीं महाराज।’ कारण पूछने पर मंत्री कुछ दिन टालता रहा, पर अंततः उदाहरण से समझाने का निश्चय किया। मंत्री राजा को एकांत में ले गया और एक अजनबी बालक को बुलाया। उसने बालक से कहा कि राजा को थप्पड़ मारे, रोज–रोज मुझसे प्रश्न पूछता है। बालक ने अनसुना कर दिया। तभी राजा को गुस्सा आया। राजा ने उसी बच्चे को आदेश दे डाला कि मंत्री को थप्पड़ मारे। बालक ने तुरंत आज्ञा का पालन किया। मंत्री शांतचित खड़ा रहा और बोला बोला— ‘महाराज! मंत्र-शक्ति भी इस बालक की तरह ही है, जो केवल अधिकारी व्यक्ति के आदेश का पालन करती है। जिसे इतना विवेक होता है कि किसे लाभ देना चाहिए और किसे नहीं। किस पर कृपा बरसानी चाहिए और किस पर नहीं।’
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