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Diwali 2025 : धन की देवी, बुद्धि के देवता... दिवाली पर क्यों होती है मां लक्ष्मी के साथ श्रीगणेश की पूजा?

दिवाली की रात मां लक्ष्मी और भगवान गणेश जी की पूजा की जाती है

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Diwali 2025 : दिवाली एक ऐसा त्योहार है, जिसे पूरे देश में उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। यह त्योहार अंधकार पर प्रकाश और असत्य पर सत्य की जीत के रूप में मनाया जाता है। इस दिन लोग ना सिर्फ घरों को दीपों से रोशन करते हैं, बल्कि द्वार पर रंगोली, फूलों और बिजली की लड़ियों से भी सजावट करते हैं। वहीं, दिवाली की रात मां लक्ष्मी और भगवान गणेश जी की पूजा की जाती है।

हालांकि हर किसी के मन में यही सवाल उठता है कि अगर दिवाली का त्योहार भगवान श्री राम, माता सीता और लक्ष्मण के घर लौटने की खुशी में मनाया जाता है तो इस दौरान माता लक्ष्मी व श्री गणेश जी की पूजा क्यों की जाती है। चलिए जानते हैं इससे जुड़ी पौराणिक कथा...

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पौराणिक कथा के अनुसार

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हिंदू धर्म में भगवान गणेश बुद्धि और मां लक्ष्मी धन-समृद्धि की प्रतीक मानी जाती है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, एक बार भगवान विष्णु और देवी लक्ष्मी वैकुंठ में बातें कर रहे थे। तभी देवी ने कहा कि मैं धन, समृद्धि, सौभाग्य, ऐश्वर्य प्रदान करती हूं इसलिए मेरी पूजा करना सर्वोत्तम है। भगवान विष्णु ने देवी के बातों में अभिमान को भाप लिया। इस पर भगवान ने कहा कि देवी आप सर्वश्रेष्ठ हैं, लेकिन मातृत्व के बिना एक स्त्री का नारीत्व अधूरा माना जाता है।

यह सुनकर मां लक्ष्मी बहुत निराश हो गई और अपने नारीत्व को पूरा करने के लिए वह देवी पार्वती के पास पहुंचीं। मां पार्वती के 2 पुत्र थे इसलिए देवी लक्ष्मी ने उनसे एक पुत्र गोद देने के लिए कहा। मां पार्वती ने देवी लक्ष्मी के दर्द को समझते हुए श्री गणेश उन्हें सौंप दिया। तब मां लक्ष्मी ने कहा कि उनकी पूजा के बाद श्रीगणेश जी की पूजा करने से घर में सुख-समृद्धि का वास होगा। यही कारण है कि दिवाली के दिन मां लक्ष्मी के साथ श्रीगणेश की पूजा की जाती है।

दिवाली पर मां लक्ष्मी करती हैं धरती पर भ्रमण

हिंदू धर्म में मां लक्ष्मी को धन, वैभव, सुख-समृद्धि की देवी माना जाता है। दिवाली की रात, विशेष रूप से अमावस्या की रात होती है, जब चंद्रमा नहीं होता और चारों ओर अंधकार होता है। ऐसी मान्यता है कि इस रात मां लक्ष्मी पृथ्वी पर भ्रमण करती हैं और जो लोग स्वच्छता, दीपों की रोशनी और श्रद्धा से उनकी पूजा करते हैं, उनके घरों में वे स्थायी रूप से निवास करती हैं।

डिस्केलमनर: यह लेख/खबर धार्मिक व सामाजिक मान्यता पर आधारित है। dainiktribneonline.com इस तरह की बात की पुष्टि नहीं करता है।

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