एक बार राष्ट्रपति डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम को एक कार्यक्रम में विद्यार्थियों को संबोधित करने के लिए बुलाया गया। जैसे ही डॉ. कलाम मंच पर पहुंचे, कुछ ही देर में बिजली चली गई। पूरा स्टाफ जल्दी से जनरेटर और माइक को ठीक करने के लिए भाग-दौड़ करने लगा। अचानक सब कुछ अव्यवस्थित हो गया है। लेकिन डॉ. कलाम बिल्कुल शांत थे। वे मंच से उतरे और सीधे हॉल के बीचों-बीच जाकर खड़े हो गए। डॉ. कलाम मुस्कराते हुए बोले, ‘कोई बात नहीं, अगर बिजली चली गई। माइक बिना बिजली के काम नहीं कर सकता, लेकिन मैं बिना बिजली के भी बोल सकता हूं। आप सभी लोग आसपास आ जाइए, ताकि हम एक-दूसरे की बातें सुन सकें।’ यह सुनते ही विद्यार्थी खुशी से झूम उठे। पूरा हॉल तालियों की गूंज से गूंज उठा। इसके बाद उन्होंने विद्यार्थियों से बातचीत की, उनकी बातें सुनीं और उन्हें विज्ञान की ओर कदम बढ़ाने के लिए प्रेरित किया। बिना माइक और बिजली के हुई यह कक्षा वहां उपस्थित विद्यार्थियों के लिए सबसे यादगार और अद्भुत कक्षा बन गई। डॉ. कलाम चाहते थे कि उन्हें सदैव एक शिक्षक के रूप में याद किया जाए।
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