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सम्मान का हकदार

एकदा

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एक दिन स्कूल में छुट्टी होने के कारण एक दर्जी का बेटा अपने पिता की दुकान पर चला गया। वहां जाकर वह बड़े ध्यान से अपने पिता को काम करते हुए देखने लगा। उसने देखा कि उसके पिता कैंची से कपड़ा काटते हैं और कैंची को पैर के पास नीचे दबाकर रख देते हैं। फिर सुई से कपड़ा सीते हैं और सिलने के बाद सुई को अपनी टोपी पर लगा लेते हैं। जब उसने यह क्रिया कई बार देखी तो उससे रहा नहीं गया। उसने अपने पिता से पूछा, ‘पिताजी, आप ऐसा क्यों करते हैं?’ पिता ने मुस्कुराकर उत्तर दिया, ‘बेटा, कैंची काटने का काम करती है और सुई जोड़ने का। जो काटता है उसकी जगह हमेशा नीचे होती है, और जो जोड़ता है उसकी जगह हमेशा ऊपर होती है। इसलिए मैं सुई को टोपी पर और कैंची को पैर के नीचे रखता हूं।’

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