Dadi-Nani Ki Baatein : नए साल पर मत रोओ, वरना पूरा साल दुख में गुजरेगा... ऐसा क्यों कहती है दादी-नानी?
नए साल की शुरुआत हंसी-खुशी और अच्छे शब्द व व्यवहार के साथ करनी चाहिए
Dadi-Nani Ki Baatein : भारत में नया साल सिर्फ तारीख बदलने का दिन नहीं माना जाता बल्कि यह जीवन में नए आरंभ, नई उम्मीदों और पॉजिटिव एनर्जी का प्रतीक भी होता है। इसी भावना से जुड़ी कई परंपराएं और मान्यताएं हैं, जिन्हें पीढ़ियों से दादी-नानी सुनाती आई हैं। उन्हीं में से एक है कि नए साल पर रोना। ऐसा माना जाता है कि नए साल के दिन रोना नहीं चाहिए, वरना पूरा साल दुख में बीतता है।
अच्छे विचारोंं से हो नए साल को शुरुआत
माना जाता है कि साल के पहले दिन का व्यवहार और सोच पूरे साल के लिए दिशा तय करता है। दादी-नानी का मानना है कि किसी भी चीज की शुरुआत जैसी होती है, वैसा ही उसका असर आगे पड़ता है। ऐसे में नए साल पर रोने के लिए मना किया जाता है।
रोना नकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक
दादी-नानी मानती हैं कि रोना दुख, हानि और नकारात्मकता का प्रतीक है। अगर साल का पहला दिन ही रोने में बीते, तो मन और वातावरण में नकारात्मक ऊर्जा प्रवेश कर जाती है इसलिए नए साल की शुरुआत हंसी-खुशी और अच्छे शब्द व व्यवहार के साथ करनी चाहिए।
क्या कहता है धर्म व वास्तु शास्त्र?
धार्मिक व वास्तु दृष्टि से भी नए साल को देवी-देवताओं की कृपा से जोड़ा जाता है। माना जाता है कि इस दिन मन, वचन और कर्म शुद्ध रखने से भगवान की कृपा पूरे साल बनी रहती है। रोना, शिकायत करना या दुख व्यक्त करना भगवान के प्रति असंतोष के रूप में देखा जाता था। ऐसे में दादी-नानी सलाह देती हैं कि इस दिन भगवान का धन्यवाद करें, न कि अपने दुखों का रोना रोएं।
परिवार व दोस्तों के साथ करें सेलिब्रेट
नए साल की शुरुआत पूरे परिवार , दोस्त व करीबी रिश्तेदारों के साथ मिलकर मनाना चाहिए। परिवार में हंसी-खुशी से घर का माहौल भी सकारात्मक रहता है।
हालांकि यह जरूरी नहीं कि रोने से सच में पूरा साल खराब हो जाएगा। दुख, तनाव और भावनाएं मानव जीवन का हिस्सा हैं लेकिन दादी-नानी की सीख को अगर समझा जाए त नए साल पर खुद को सकारात्मक सोचने के लिए तैयार करना चाहिए।
डिस्केलमनर: यह लेख/खबर धार्मिक व सामाजिक मान्यता पर आधारित है। dainiktribneonline.com इस तरह की बात की पुष्टि नहीं करता है।

