क्रेन, JCB और मजदूर सब फेल; 170 साल पुराने मंदिर की प्रतिमा ने बढ़ाई इंजीनियरों की टेंशन, आखिर क्यों नहीं हिले उज्जैन के खड़े हनुमान?
10 दिन की कोशिश के बाद IIT इंदौर के एक्सपर्ट करेंगे जांच
उज्जैन में करीब 170 साल पुराने खड़े हनुमान मंदिर की प्रतिमा इन दिनों चर्चा में बनी हुई है। सड़क चौड़ीकरण की जद में आए मंदिर को हटाने के बाद प्रशासन ने प्रतिमा को सुरक्षित तरीके से दूसरी जगह ले जाने की कोशिश की, लेकिन मशीनरी भी इसे हिला नहीं सकी। क्रेन और JCB के साथ कई मजदूरों ने लगातार प्रयास किए, लेकिन प्रतिमा जगह से टस से मस नहीं हुई।
लगातार असफल हो रही कोशिशों के बाद प्रशासन ने अब तकनीकी विशेषज्ञों की मदद लेने का फैसला किया है। IIT इंदौर के विशेषज्ञ प्रतिमा के आसपास की जमीन, उसकी संरचना और वजन समेत तकनीकी पहलुओं का अध्ययन करेंगे। रिपोर्ट के आधार पर तय होगा कि प्रतिमा को बिना नुकसान पहुंचाए हटाना संभव है या नहीं।
जमीन के अंदर गहराई तक जुड़ी होने का अनुमान
प्रतिमा के न हिलने को लेकर कई तरह की चर्चाएं हैं। पुरातत्व विशेषज्ञों की ओर से यह संभावना जताई जा रही है कि प्रतिमा जमीन के भीतर काफी गहराई तक स्थापित हो सकती है। प्राचीन समय में इस्तेमाल होने वाली इंटरलॉक तकनीक भी इसकी वजह हो सकती है। वहीं, मजबूत बेसाल्ट पत्थर से बनी होने के कारण प्रतिमा का वजन भी काफी अधिक माना जा रहा है।
भक्तों के लिए ‘चमत्कार’, प्रशासन के लिए तकनीकी चुनौती
प्रतिमा को लेकर स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं की आस्था भी गहरी है। मान्यता है कि यहां मन्नत मांगने से बच्चों और बीमार लोगों को लाभ मिलता है, इसी वजह से इन्हें ‘डॉक्टर हनुमान’ भी कहा जाता है। प्रतिमा के नहीं हिलने को कई भक्त भगवान का संकेत मान रहे हैं।
अब IIT की रिपोर्ट पर टिकी नजर
फिलहाल प्रतिमा की सुरक्षा के लिए मंदिर के पास कैनोपी लगाई गई है। प्रशासन भी किसी जल्दबाजी के बजाय विशेषज्ञों की रिपोर्ट का इंतजार कर रहा है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है- क्या तकनीक खड़े हनुमान की पहेली सुलझा पाएगी, या प्रतिमा अपनी जगह ही कायम रहेगी?

