एक बार की बात है, एक कला प्रेमी ने महान इतालवी मूर्तिकार माइकल एंजेलो से उनकी विश्वप्रसिद्ध ‘डेविड’ की मूर्ति को देखकर आश्चर्य से पूछा- महोदय, आपने पत्थर के एक साधारण और बेजान टुकड़े से इतनी जीवंत और सुंदर मूर्ति का निर्माण कैसे किया? यह तो किसी चमत्कार से कम नहीं लगता। माइकल एंजेलो ने मुस्कुराते हुए बहुत ही खूबसूरत उत्तर दिया, 'मैंने कोई निर्माण नहीं किया। यह मूर्ति तो पहले से ही उस पत्थर में विद्यमान थी। मैंने तो बस पत्थर के उस अनावश्यक हिस्से को छेनी-हथौड़े से काट कर हटा दिया, जो मूर्ति नहीं था। जैसे ही मैंने पत्थर से फालतू परतों को हटाया, उसमें मूर्ति के रूप में छिपा उसका सत्य अपने आप प्रकट हो गया।' माइकल एंजेलो ने दार्शनिक अंदाज़ में उस कला प्रेमी से कहा-जीवन का भी यही सार है। हमें पूर्णता पाने के लिए बाहर से कुछ नया नहीं जोड़ना है, बल्कि अपने भीतर छिपे क्रोध, अहंकार और ईर्ष्या रूपी अनावश्यक पत्थरों को हटाना है। तभी हमारा श्रेष्ठ स्वरूप निखरकर सामने आएगा।
+
Advertisement
Advertisement
Advertisement
×

