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शांति और मानवीय मूल्यों के सौंदर्य का प्रतीक

लोटस टेम्पल

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बहाई धर्म, एकता, शांति और समानता के सिद्धांतों पर आधारित है। इसकी शिक्षाएं सभी धर्मों की एकता, मानवता की सेवा और सामाजिक न्याय को प्रोत्साहित करती हैं।

बहाई धर्म की मूल शिक्षाएं ईश्वर, धर्म और मानवजाति की एकता पर केंद्रित हैं। विज्ञान और धर्म मानव जाती रूपी पक्षी के दो पंख हैं, जिनसे मानवता उड़ान भर सकता है; इनका सामंजस्य होना आवश्यक है। सच्चा विज्ञान और सच्चा धर्म कभी संघर्ष में नहीं पड़ सकते। दुनियाभर में हज़ारों स्थानों पर, बहाई धर्म की शिक्षाएं व्यक्तियों और समुदायों को प्रेरित करती हैं। वे निःशुल्क शिक्षा कक्षाओं, भक्ति सभाओं, सामाजिक प्रवचनों और सामाजिक कार्यों के माध्यम से अपने जीवन को बेहतर बनाने और सभ्यता के विकास में योगदान देने के लिए प्रयासरत हैं।

भारत में प्रमुख स्थल

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भारत में बहाई धर्म, नयी दिल्ली स्थित अपने उपासना स्थल के लिए प्रसिद्ध है, जिसे खिलते हुए कमल के फूल की तरह डिज़ाइन किया गया है। यह भारत का प्रतीक बन गया है और प्रतिदिन हज़ारों पर्यटकों को आकर्षित करता है। इसे अक्सर ‘लोटस टेम्पल’ कहा जाता है, यह पवित्र कमल के फूल से प्रेरित अपनी विशिष्ट संरचना के लिए प्रसिद्ध है, जो भारतीय संस्कृति में पवित्रता, सौंदर्य और दिव्यता का प्रतीक है। वर्ष 1986 में बनकर तैयार हुए इस मंदिर की सबसे उल्लेखनीय विशेषता इसकी 27 सफेद संगमरमर से ढकी, स्वतंत्र पंखुड़ियां हैं, जो तीन-तीन के समूहों में व्यवस्थित होकर नौ भुजाएं बनाती हैं, जो सभी धर्मों और मानवता की एकता का प्रतीक हैं। यह मंदिर 26.5 एकड़ में फैले हरे-भरे बगीचों से घिरे एक चबूतरे पर स्थित है, जो पानी और हरियाली के बीच तैरते कमल के फूल के रूप में इसकी शोभा बढ़ाता है।

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लोटस टेम्पल की वास्तुकला

इसमें नौ प्रवेश द्वार हैं, जिनमें से प्रत्येक के दोनों ओर तैरते हुए कमल के पत्तों जैसे परावर्तक कुंड हैं, जो इमारत को ठंडा रखने में मदद करते हैं। इस मंदिर ने कई वास्तुशिल्प और पर्यावरण पुरस्कार जीते हैं और इसे आधुनिक डिज़ाइन की उत्कृष्ट कृति माना जाता है, जिसमें प्राचीन प्रतीकों को उन्नत इंजीनियरिंग के साथ जोड़ा गया है। बहाई समुदाय ने ईश्वर के प्रति प्रेम से इस मंदिर का निर्माण कराया और इसे समस्त मानव जाति को समर्पित किया। यह समस्त मानव जाति के आध्यात्मिक उत्थान के लिए शांति, एकता और सद्भाव के प्रतीक के रूप में खड़ा है, जो मानव हृदय में ईश्वर की खोज की इच्छा को दर्शाता है।

धर्मों की एकता का प्रतीक

इस मंदिर के अंदर दुनिया के सभी प्रमुख धर्मों के धर्मग्रंथ पढ़े या गाए जाते हैं, जो बहाई एकता और विश्व बंधुत्व के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं। मंदिर में न तो कोई पुजारी है, न ही कोई प्रतिमा या चित्र। मंदिर प्रार्थना गृह हर धर्म, जाति या पृष्ठभूमि के लोगों के लिए बैठने के लिए खुला है, जो मौन ध्यान में एकत्रित होते हैं—आध्यात्मिक समानता की एक शक्तिशाली अभिव्यक्ति! इस धर्म की शिक्षाओं में से एक यह विश्वास है कि ईश्वर का सच्चा मंदिर मानव हृदय है; इस प्रकार, बाहरी सुंदरता आंतरिक आध्यात्मिक शुद्धता का प्रतिबिम्ब है। ‘20वीं सदी का ताजमहल’ कहे जाने वाले इस मंदिर के सफेद संगमरमर, सुंदर वक्र और शांत वातावरण ने इसे सबसे अधिक देखे जाने वाले स्थलों में से एक बना दिया है, जो हर दिन दुनियाभर से हजारों पर्यटकों को आकर्षित करता है।

सामाजिक सिद्धांत

बहाई धर्म में, हिंदू, बौद्ध, यहूदी, ईसाई और इस्लाम सहित सभी प्रमुख विश्व धर्मों को एक ही, विकसित होती दिव्य योजना का हिस्सा माना जाता है। ईश्वर मानवता को शिक्षा देने और युग एवं संदर्भ के अनुकूल आध्यात्मिक एवं सामाजिक सत्यों को प्रकट करने के लिए पूरे इतिहास में दिव्य अवतारों या संदेशवाहकों को भेजता है। प्रत्येक प्रकटीकरण पिछले प्रकटीकरण पर आधारित होता है, जो एक निरंतर प्रगतिशील सभ्यता का मार्ग प्रशस्त करता है। बहाई धर्म के संस्थापक, बहाउल्लाह ने घोषणा की, ‘सारी पृथ्वी एक देश है और मानवजाति उसके नागरिक हैं।’

समानता और शिक्षा का महत्व

अन्य सामाजिक शिक्षाएं स्त्री और पुरुष की समानता का समर्थन करती हैं, जो सामाजिक प्रगति के लिए एक आवश्यक नैतिक और आध्यात्मिक मापदंड है। शिक्षा, विशेषकर लड़कियों का नैतिक और आध्यात्मिक विकास, मानव उन्नति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। आध्यात्मिक और व्यावहारिक उपायों के माध्यम से अत्यधिक धन और गरीबी को मिटाने के लिए समाज का पुनर्गठन किया जाना चाहिए, साथ ही व्यक्तिगत संपत्ति के अधिकारों को मान्यता दी जानी चाहिए। सभी लोगों के बीच बेहतर संचार और समझ को बढ़ावा देने के लिए एक सार्वभौमिक सहायक भाषा को अपनाया जाना चाहिए। एक एकीकृत विश्व व्यवस्था के लिए, विवादों को सुलझाने के लिए एक विश्व न्यायाधिकरण सहित एक वैश्विक संघीय प्रणाली की स्थापना सर्वोच्च लक्ष्य है। अंततः बहाई पवित्र ग्रंथ मानवता की सेवा की भावना से किए गए कार्य को उपासना के रूप में महिमामंडित करते हैं।

वैश्विक उपस्थिति

दुनिया में 50 लाख से ज़्यादा बहाई हैं। बहाई धर्म लगभग हर देश और कई आश्रित क्षेत्रों में स्थापित है। बहाई एक लाख से भी ज़्यादा इलाकों में रहते हैं। बहाई समुदाय में लगभग 2,100 मूल जनजातियां, नस्लें और जातीय समूह शामिल हैं। वर्तमान में 188 राष्ट्रीय स्तर की परिषदें हैं, जो सामुदायिक कार्यों की देखरेख करती हैं। 300 से ज़्यादा प्रशिक्षण संस्थानों का एक नेटवर्क, जो बहाई शिक्षा के औपचारिक कार्यक्रम प्रदान करता है, दुनियाभर में फैला हुआ है। वर्तमान में 14 बहाई उपासना स्थल हैं और स्थानीय स्तर पर, दुनियाभर के बहाई केंद्रों और धर्मावलंबियों के घरों में नियमित रूप से उपासना सभाएं आयोजित की जाती हैं। बहाई लेखन और अन्य साहित्य का 800 से ज़्यादा भाषाओं में अनुवाद किया जा चुका है। हर साल, लगभग दस लाख लोग इस्राइल के हाइफ़ा में माउंट कार्मेल स्थित बहाई तीर्थस्थल और उद्यानों में आते हैं।

बहाई समुदाय की भूमिका

सामाजिक और आर्थिक विकास में बहाई समुदाय के हज़ारों प्रयासों में से 900 से ज़्यादा बड़े पैमाने की, सतत परियोजनाएं हैं, जिनमें 600 से ज़्यादा स्कूल और 70 से ज़्यादा विकास एजेंसियां शामिल हैं। बहाई अंतर्राष्ट्रीय समुदाय 1948 से संयुक्त राष्ट्र में एक गैर-सरकारी संगठन के रूप में पंजीकृत है। वर्तमान में इसे संयुक्त राष्ट्र आर्थिक एवं सामाजिक परिषद और संयुक्त राष्ट्र बाल कोष के साथ परामर्शदात्री का दर्जा प्राप्त है। इसके साथ ही, संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम और संयुक्त राष्ट्र लोक सूचना विभाग से मान्यता प्राप्त है। बहाई अंतर्राष्ट्रीय समुदाय संयुक्त राष्ट्र और उसकी विशिष्ट एजेंसियों के साथ-साथ सदस्य देशों, अंतर-सरकारी और गैर-सरकारी संगठनों, शिक्षाविदों और कार्यकर्ताओं के साथ सहयोग करता है। इसके प्रतिनिधि कार्यालय अदीस अबाबा, ब्रुसेल्स, काहिरा, जिनेवा, जकार्ता और न्यूयॉर्क में हैं।

प्रयास

इस प्रकार, दुनियाभर के बहाई समानता और न्याय पर आधारित एक अधिक एकजुट, शांतिपूर्ण औरपूर्वाग्रह-मुक्त समाज बनाने के लिए कड़ी मेहनत कर रहे हैं।

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