एक बार एंतोनी चेखव से मैक्सिम गोर्की ने उनकी जीवन शैली पर चर्चा करते हुए उनसे दावतों और समारोहों में शामिल होने की राय दी। चेखव ने सादगी से जवाब दिया कि मैं एक गुलाम का पोता और एक साधारण दुकानदार का बेटा हूं। आज अपना लेखक रूप बचाना चाहता हूं। मुझे अपना एकांत और अपनी कलम बस इनकी ही महफिल पसंद है। सुनकर गोर्की ने उनकी पीठ थपथपाई और कहा कि चेखव यह शानदार चरित्र ही तुम्हारा सुनहरा भविष्य बनेगा। गोर्की उनके सरल और जुझारू व्यक्तित्व से प्रभावित थे और उनकी लेखकीय प्रतिभा के प्रबल प्रशंसक थे। गोर्की और चेखव की मैत्री उस युग के रूसी साहित्य मे आज तक चर्चित है। एंतोनी चेखव एक रूसी नाटककार, कथाकार और चिकित्सक थे। रोजमर्रा के मानवीय जीवन के सार को पकड़ने की अपनी अद्वितीय क्षमता के लिए प्रसिद्ध, वे आधुनिक साहित्य की एक महान हस्ती रहे हैं। सन् 1888 में उन्हें रूस का सर्वोच्च सम्मान ‘पुश्किन पुरस्कार’ प्राप्त हुआ। वे सूक्ष्म मानवीय संवेदनाओं, चरम पीड़ा की वेदना और मनुष्य के दुर्भाग्य का अत्यंत सहज चित्रण करने वाले असाधारण कलमकार थे। उनकी कहानी कला और नाट्य लेखन ने उन्हें जीवित रहते ही किंवदंती पुरुष बना दिया था।
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