शिवराज ने हासिल किया विश्वास मत

भोपाल, 24 मार्च (एजेंसी)

भोपाल में मंगलवार को बातचीत करते मध्य प्रदेश के सीएम शिवराज सिंह चौहान और पूर्व सीएम कमलनाथ। - प्रेट्र

मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के एक दिन बाद शिवराज सिंह चौहान ने मंगलवार को विश्वास मत हासिल किया। हालांकि, इस दौरान सदन में विपक्षी दल कांग्रेस का कोई विधायक उपस्थित नहीं था। सदन की संक्षिप्त बैठक में चौहान ने एक पंक्ति का विश्वास प्रस्ताव पेश किया जिसे सदन में उपस्थित सत्ता पक्ष भाजपा, निर्दलीय एवं अन्य विधायकों ने ध्वनिमत से अपना समर्थन दिया। स्पीकार की जिम्मेदारी संभाल रहे वरिष्ठ विधायक जगदीश देवड़ा ने सरकार द्वारा विश्वास मत हासिल किए जाने की घोषणा की जिसके बाद सदन की कार्यवाही 27 मार्च तक के लिए स्थगित कर दी गई। विश्वास मत हासिल करने के बाद चौहान ने संवाददाताओं से कहा, ‘कांग्रेस ने जो किया वह अलोकतांत्रिक है। उसके विधायक सदन में अनुपस्थित रहे।’ वहीं, प्रदेश के पूर्व मंत्री और कांग्रेस विधायक पीसी शर्मा ने कहा, ‘भाजपा सरकार को खाली पड़ी 24 विधानसभा सीटों पर उपचुनाव के बाद विश्वास मत मांगना चाहिए था।’ हालांकि बाद में राज्य के पूर्व सीएम कमलनाथ नये मुख्यमंत्री शिवराज से मिलने गए और मध्य प्रदेश के विकास में पूर्ण सहयोग का आश्वासन दिया।

चुनौतियों के पहाड़ भी हैं हरीश लखेड़ा/ट्रिन्यू नयी दिल्ली : मध्य प्रदेश में शिवराज की चौथी बार ताजपोशी के साथ ही देश में भाजपा व एनडीए शासित प्रदेशों के कुनबे में इजाफा हो गया है। बहरहाल, शिवराज ने मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री की कुर्सी तो संभाल ली है, लेकिन उनके सामने चुनौतियों के पहाड़ भी हैं। मध्य प्रदेश में लगभग 15 माह बाद फिर से भाजपा का कमल खिल जाने से शिवराज का वनवास भी समाप्त हो गया है। वे पहली बार 29 नवंबर 2005 को मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री बने थे। इसके बाद वे 12 दिसंबर, 2008 को दूसरी बार तथा 8 दिसंबर, 2013 को तीसरी मुख्यमंत्री बने थे। अब पूर्वोत्तर के 8 राज्यों से लेकर उत्तर प्रदेश, हरियाणा, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, कर्नाटक, गुजरात व बिहार के साथ अब मध्य प्रदेश में भी एनडीए की सरकार है। ये होंगी चुनौतियां : शिवराज के लिए सबसे पहले प्रदेश को कोराेना से बचाने की चुनौती है। इसके अलावा 24 विधानसभा सीटों के उपचुनाव होने हैं। इनमें से 22 सीटें तो कांग्रेस विधायकों के इस्तीफे के बाद खाली हुई हैं। प्रदेश विधानसभा की सभी 230 सीटों पर विधायक चुने जाने के बाद शिवराज को विधानसभा में बहुमत पाने के लिए 116 विधायकों की आवश्यकता होगी, जबकि भाजपा के अभी 107 विधायक हैं और उन्हें अपने दम पर बहुमत पाने के लिए इन 24 में से कम से कम 10 सीटें जीतना जरूरी है। इसी तरह प्रदेश में नगर निकाय और पंचायत चुनाव होने हैं। इसके साथ ही शिवराज को कमलनाथ सरकार की किसानों की कर्ज माफी योजना को भी जारी रखना है।

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