आप ऐसे बर्ताव कर रहे हैं जैसे जामा मस्जिद पाकिस्तान हो

नयी दिल्ली, 14 जनवरी (एजेंसी) दिल्ली की एक अदालत ने जामा मस्जिद पर नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) विरोधी प्रदर्शन के दौरान 20 दिसंबर को लोगों को भड़काने के आरोपी भीम आर्मी के प्रमुख चंद्रशेखर आजाद के खिलाफ कोई सबूत नहीं दिखा पाने को लेकर मंगलवार को दिल्ली पुलिस को फटकार लगाई। कोर्ट ने कहा कि लोग सड़कों पर इसलिए हैं क्योंकि जो चीजें संसद के अंदर कही जानी चाहिए थी, वे 'नहीं कही गयीं'। अदालत ने आजाद की जमानत अर्जी पर सुनवाई करते हुए कहा कि प्रदर्शन करना किसी भी व्यक्ति का संवैधानिक अधिकार है और दिल्ली पुलिस ऐसे बर्ताव कर रही है 'जैसे कि जामा मस्जिद पाकिस्तान है।' सुनवाई के दौरान सरकारी वकील पंकज भाटिया ने पुलिस की ओर से पेश होते हुए जमानत अर्जी का विरोध किया और कहा कि आजाद ने जामा मस्जिद के प्रांगण में उत्तेजक भाषण दिया और लोगों को हिंसक प्रदर्शन करने के लिए उकसाया। इस पर अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश कामिनी लॉ ने कहा, ‘... हमें अपना विचार व्यक्त करने का पूरा हक है लेकिन हम देश को नष्ट नहीं कर सकते। हम उसे टुकड़े टुकड़े नहीं कर सकते।' जब न्यायाधीश ने पूछा कि पुलिस के पास आजाद के खिलाफ आरोप साबित करने के लिए क्या सबूत है तो सरकारी वकील ने भीम आर्मी की सोशल मीडिया पोस्टों का हवाला दिया। भाटिया ने कहा कि इन पोस्टों में वह लोगों से जामा मस्जिद पहुंचने और धरना देने का आह्वान करते हैं। इस पर न्यायाधीश ने सवाल किया, ‘जामा मस्जिद जाने में क्या समस्या है? 'धरने' में क्या गलत है? प्रदर्शन करना व्यक्ति का संवैधानिक हक है। हिंसा कहां हुई? इन पोस्टों में से किसी में क्या गलत है? क्या आपने संविधान पढ़ा है।' अदालत ने कहा, ‘आप ऐसे बर्ताव कर रहे हैं जैसे जामा मस्जिद पाकिस्तान हो और यदि वह पाकिस्तान है तो भी आप वहां जा सकते हैं और प्रदर्शन कर सकते हैं। पाकिस्तान अविभाजित भारत का हिस्सा था।' अदालत ने पुलिस के जांच अधिकारी से उन सारे सबूतों को पेश करने को कहा जो दर्शाते हों कि आजाद जामा मस्जिद में सभा में कथित रूप से भड़काऊ भाषण दे रहे थे। केरल सरकार सीएए के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंची केरल सरकार ने मंगलवार को संशोधित नागरिकता कानून को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। याचिका में केरल सरकार ने कोर्ट से अनुरोध किया है कि इस कानून को संविधान में प्रदत्त समता, स्वतंत्रता और पंथनिरपेक्षता के सिद्धांतों का उल्लंघन करने वाला करार दिया जाये। मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के नेतृत्व वाली केरल सरकार इस कानून को कोर्ट में चुनौती देने वाली पहली राज्य सरकार है। केरल विधानसभा ने सबसे पहले इस कानून के खिलाफ प्रस्ताव भी पारित किया था। जेएनयू मामला : व्हाट्सएप, गूगल को जानकारी देने का आदेश दिल्ली हाईकोर्ट ने व्हाट्सएप और गूगल को जेएनयू हमले के संबंध में पुलिस द्वारा मांगी गई जानकारी उनकी अपनी आंतरिक नीतियों के मुताबिक संरक्षित रखने और उपलब्ध करवाने का मंगलवार को निर्देश दिया। जस्टिस ब्रिजेश सेठी ने पुलिस से कहा कि वह गवाहों को जल्द से जल्द तलब करे और उन दो वॉट्सऐप समूहों के सदस्यों के फोन जब्त करे जिन पर 5 जनवरी को जेएनयू में हुई हिंसा का समन्वय किया गया था। यह निर्देश जारी करते हुए अदालत ने जेएनयू के प्रोफेसर अमित परमेश्वरन, अतुल सूद और शुक्ला विनायक सावंत की ओर से दायर याचिका का निबटारा कर दिया। इस बीच, व्हाट्सएप ने अदालत को बताया कि चैट एक बार दूसरे व्यक्ति के पास पहुंच जाती है तो वह सर्वर पर स्टोर नहीं रहती है। उसने दावा किया कि चैट भेजने वाले और पाने वाले के फोन पर ही मिल सकती है। आदेश आने से पहले गूगल ने अदालत से कहा था कि अगर पुलिस उसे दो व्हाट्सएप ग्रुप ‘यूनिटी अगेंस्ट लेफ्ट’ और ‘फ्रेंड्स ऑफ आरएसएस’ के सदस्यों की जानकारी दे, ईमेल आईडी आदि दे तो वह पता लगा सकती है कि चेट हिस्ट्री का बैकअप गूगल ड्राइव पर हुआ है या नहीं। शाहीन बाग सड़क खाली कराने में जुटी दिल्ली पुलिस पुलिस ने दिल्ली में जामिया मिल्लिया इस्लामिया के पास कालिंदी कुंज-शाहीन बाग सड़क को खाली कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। सीएए के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे लोगों ने एक महीने से इसे अवरुद्ध कर रखा है। कालिंदी कुंज-शाहीन बाग खंड पर यातायात प्रतिबंधों पर पुलिस को गौर करने का दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा निर्देश दिए जाने के बाद यह कदम उठाया गया है।

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