4 वरिष्ठ अधिकारियों सहित 5 पर गिरी गाज

करनाल, 4 दिसंबर (हप्र)

करनाल के नगर निगम कार्यालय में बुधवार को फाइलों को खंगालते स्थानीय निकाय मंत्री अनिल विज। -सईद अहमद

हरियाणा के गृह मंत्री अनिल विज ने बुधवार को करनाल नगर निगम कार्यालय पर छापामार कार्रवाई करते हुए निगम के कई महकमों की फाइलों को खंगाला। इस दौरान विभागीय कार्रवाई में अनिमितताएं पाये जाने पर उन्होंने अधिकारियों को जमकर लताड़ लगाई। मुख्यमंत्री के गृह क्षेत्र में किसी मंत्री का यह पहला छापा है। जानकारी के अनुसार छापे के दौरान 4 वरिष्ठ अधिकारियों समेत 5 लोगों को पर गाज गिरी है। गृह मंत्री ने मौखिक रूप से उनके निलम्बन के आदेश कर दिये। लेकिन चंडीगढ़ से अभी इनके आदेश आने हैं। इनमें आडिट ब्रांच के डिप्टी डायरेक्टर राम कुमार, एक्सईएन एलसी चौहान, एसडीओ लख्मी चंद, डीटीपी मोहन सिंह और पियन दीपक शामिल हैं। वरिष्ठ अधिकारी इस बात के संकेत दे रहे हैं कि उक्त अधिकारियों के निलम्बन के आदेश जारी होंगे। इधर, यह भी बताया गया कि मंत्री ने डीटीपी मोहन सिंह से जबाव तलब किया है। अगर मंत्री संतुष्ट नहीं हुए तो डीटीपी मोहन सिंह पर भी निलम्बन की गाज गिर सकती है। दोपहर बाद आज अचानक निगम कार्यालय में पहुंचे गृह मंत्री अनिल विज ने सिलसिलेवार कई विभागों की फाइलें खंगाली और कार्रवाई का इंद्राज रजिस्टर में दर्ज नहीं होने पर अधिकारियों से जवाब तलब किया। इस दौरान अधिकारियों ने बहानेबाजी करने का प्रयास किया कि तो मंत्री ने कहा, मैं अंगूठा छाप  नहीं हूं। मुझे जवाब दो कि जनता द्वारा लिखे गये पत्रों पर आप क्या कार्रवाई कर रहे हैं, उसका रिकार्ड कहां है। कार्रवाई के दौरान मेयर रेनुबाला गुप्ता और वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे। मंत्री जी के गुस्से से बचने के लिए अधिकारियों ने एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डालने का प्रयास किया। इस दौरान बसंत विहार के पार्षदों समेत कई पार्षदों ने भी निगम में कामकाज नहीं होने की शिकायत की। उन्होंने बताया कि सीवरेज, सड़क मरम्मत और स्ट्रीट लाइट के मामले में लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है और निगम पर्याप्त कार्रवाई नहीं कर रहा है। सकपकाये खड़े रहे कर्मचारी गृह मंत्री अनिल विज निगम के उस कक्ष में भी पहुंचे, जहां जनता की शिकायतें प्राप्त की जाती हैं। उन्होंने रजिस्टर चैक करते हुए कर्मचारियों की गलती पकड़ ली। फिर पूछा इस शिकायत का नम्बर क्यों नही लगाया। कर्मचारियों ने कहा कि मार्क होने के बाद नम्बर लगता है। मंत्री जी इससे संतुष्ट नहीं हुए। उन्होंने कहा कि शिकायत मार्क होने का क्या मतलब है। शिकायत आये तो शिकायतकर्ता को रशीद दो और शिकायत कार्रवाई के लिये आगे भेजो। इस दौरान कर्मचारी सकपकाये हुए खड़े रहे।

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