38 दिन तक कोरोना के इलाज का बिल 28 लाख

नवीन पांचाल/हप्र गुरुग्राम, 8 जुलाई छाती में दर्द के इलाज के लिए एक महिला को मेदांता अस्पताल में भर्ती करवाना परिजनों को भारी पड़ गया। अस्पताल ने कोरोना के इलाज के लिए 28 लाख 38 हजार रुपये का भारी भरकम बिल परिजनों को थमा दिया। परिजन 11 लाख रुपये अस्पताल में जमा करवा चुके हैं। अस्पताल प्रबंधन का दावा है कि इलाज में सरकार द्वारा निर्धारित रेट ही लिए जा रहे हैं। बल्लभगढ़ के ऊंचा गांव की रहने वाली 47 वर्षीय संतोष को छाती में दर्द की शिकायत के चलते 1 जून को मेदांता द मेडीसिटी अस्पताल में भर्ती करवाया गया था। 1 जून की ही रात को डाॅक्टर्स ने परिजनों को बताया कि संतोष की कोरोना रिपोर्ट पाॅजिटिव है और उसकी हालत ज्यादा खराब है इसलिए उन्हें आईसीयू मंे दाखिल किया गया है। महिला के पति जसवंत सिंह का कहना है कि इस दौरान डाॅक्टर्स ने न तो उन्हें इलाज के बारे में कुछ बताया और न ही उसकी हालत के बारे में। आरोप है कि डाॅक्टर्स कभी उसकी हालत ठीक होने की जानकारी देते तो कभी गंभीर होने की बात बताकर भयभीत कर देते। बकौल जसवंत, ‘संतोष की पांच लाख रुपये की मेडीकल पाॅलिसी थी। इस पाॅलिसी से सारा पैसा अस्पताल में इलाज के लिए जमा करवा दिया गया। इसके अलावा 6 लाख रुपये करीबियों व रिश्तेदारों से मांगकर अस्पताल में जमा करवा दिया गया।’ वह कहते हैं कि डाॅक्टर्स जब भी उन्हें बुलाते तो सिर्फ पैसा जमा करवाने की हिदायत ही देते। संतोष के बेटे कृष्ण सिंह का कहना है कि पिछले 38 दिन में उन्हें न तो अपनी मां से मिलने दिया गया और न ही उनके स्वास्थ्य की सही जानकारी दी गई। एक दिन पहले यानी 7 जुलाई को बुलाकर उन्हें 8 जुलाई को डिसचार्ज करने की बात कहकर 28 लाख 38 हजार रुपये का बिल थमा दिया। बकौल कृष्ण,‘अपनी जमीन बेचकर ही पैसे का इंतजाम करना पड़ेगा। इतनी रकम उधार भी नहीं मिल सकेगी।’ वह कहते हैं कि डाॅक्टर्स ने उन्हें जो बिल दिया है उसमें लैब खर्च 3 लाख 13 हजार, मेडिकल कंज्यूमेबल 3 लाख 91 हजार, कमरे का किराया 4 लाख 65 हजार दिखाया गया है। इसी तरह दवाइयों का बिल 12 लाख 92 हजार लगाया गया है। पूरे मामले की जानकारी लेंगे : डीसी डीसी अमित खत्री का कहना है कि पूरे मामले की जानकारी जुटाई जा रही है। वहीं अस्पताल के प्रवक्ता व मेडिकल आॅफिसर डाॅक्टर अविनाश दूबे का कहना है कि बिलिंग कंप्यूटर्स में सरकार द्वारा निर्धारित रेट ही फीड हैं। इसलिए इसमें कम या ज्यादा किया जाना संभव नहीं है। ज्यादा गंभीर स्थिति वाले पेशेंट्स को 12 हजार कीमत वाले इंपोर्टिड इंजेक्शन परिजनों की सहमति के बाद ही लगाए जाते हैं। फिर भी यदि बिलिंग में कोई दिक्कत है तो परिजनों को विस्तार से बताया जाएगा।

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