हरियाणा में आर्गेनिक खेती की तैयारी, किसानों को देंगे प्रशिक्षण

दिनेश भारद्वाज/ट्रिन्यू चंडीगढ़, 12 दिसंबर फलों-सब्जियों के अलावा खाद्यान्नों में लगातार बढ़ रहे केमिकल के इस्तेमाल पर खट्टर सरकार काफी गंभीर है। अत्याधिक कीटनाशकों के प्रयोग की वजह से फैल रही बीमारियों से निजात पाने के लिये अब हरियाणा फिर से प्राचीन खेती पद्धति की ओर लौटेगा। आर्गेनिक (प्राकृतिक) खेती के लिये प्रदेश के 6800 गांवों में खेती के मास्टर ट्रेनर तैयार होंगे। ट्रेनर तैयार करने का जिम्मा महाराष्ट्र के सुभाष पालेकर के कंधों पर रहेगा। गोमूत्र और गोबर से देसी खाद तैयार होगी और इसी का खेतों में इस्तेमाल होगा। पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर कम भूमि वाले किसानों को पहले चरण में इस योजना के साथ जोड़ा जाएगा। सरकार की यह भी कोशिश है कि प्राकृतिक खेती के लिये तैयार किये जाने वाले मास्टर ट्रेनर में 50 फीसदी महिलाएं हों। हरियाणा के गांवों में आज भी महिलाएं घर के काम के साथ खेतीबाड़ी का काम भी संभालती हैं। महिलाओं को इसलिये जोड़ा जा रहा है ताकि इस योजना को सिरे चढ़ाने में किसी तरह की दिक्कत न आए। दरअसल, कृषि विभाग की एक टीम ने पिछले दिनों गुजरात के खेड़ा जिले के वड़तल का दौरा किया था। यहां पूरी तरह से प्राकृतिक खेती हो रही है। वापस लौटने के बाद इस दल ने स्पष्ट कहा है कि यह बेहतरीन प्रोजेक्ट है और हरियाणा में इसे अच्छे से लागू किया जा सकता है। यह टीम अपनी विस्तृत रिपोर्ट बनाने में जुटी है। रिपोर्ट सरकार के पास जाएगी और इसके बाद ही किसानों को ट्रेंड करने की शुरुआत होगी। फिलहाल फरवरी माह में कुरुक्षेत्र में पांच दिन की ट्रेनिंग वर्कशॉप करने की योजना है। कृषि विभाग के अधिकारियों का कहना है कि सरकार को रिपोर्ट सौंपने के बाद पहले यह फैसला लिया जाएगा कि शुरुआत में कितने हैक्टेयर भूमि में प्राकृतिक खेती की जानी है। कृषि मंत्री जयप्रकाश दलाल करीब सवा 16 लाख किसान परिवारों को प्राकृतिक खेती के प्रति जागरूक करने के लिये विशेष मुहिम के संकेत पहले ही दे चुके हैं। गुजरात से लौटे दल से उन्होंने जल्द रिपोर्ट तैयार करके देने को कहा है ताकि इस मुद्दे पर मुख्यमंत्री से बातचीत की जा सके। छोटे किसानों से होगी शुरुआत कृषि विभाग का मानना है कि योजना में किसी तरह की अड़चन न आए, इसलिए यह फैसला लिया गया है कि प्राकृतिक खेती में पहले उन किसानों को जोड़ा जाएगा, जिनके पास कम भूमि है। जिन किसान परिवारों के पास देसी गाय है, उन्हें प्राथमिकता दी जाएगी। गुजरात की तर्ज पर अगर काम होता है तो गांवों में युवाओं का चयन होगा। हर गांव में एक मास्टर ट्रेनर तैयार किया जाएगा जो बाद में किसानों को प्राकृतिक खेती के तौर-तरीकों के बारे में बताएगा। इस तरह से पूरे गांव में प्राकृतिक खेती की शुरुआत होगी। गाय के गोबर की खाद करेंगे इस्तेमाल हरियाणा में पहले भी गाय के गोबर और मूत्र से बनाई गई खाद का खेतों में इस्तेमाल होता रहा है, लेकिन अधिक और जल्दी पैदावार के चक्कर में किसान दवाइयों की ओर बढ़ते गये। एक गाय के मूत्र और गोबर से 30 एकड़ भूमि में प्राकृतिक खेती की जा सकेगी। गौमूत्र, गोबर, बेसन और गुड़ को मिलाकर अर्क तैयार किया जाता है। इसी अर्क से खेती होती है।

"कृषि विभाग के अधिकारियों व वैज्ञानिकों का पांच सदस्यीय दल गुजरात में प्राकृतिक खेती का अध्ययन करके लौटा है। अभी इसकी विस्तृत रिपोर्ट तैयार नहीं हुई है। यह रिपोर्ट कृषि मंत्री के माध्यम से सरकार को भेजी जाएगी। इसके बाद तय होगा कि कितने गांवों में प्राकृतिक खेती की शुरू की जानी है। प्रदेश के 6800 गांवों में प्राकृतिक खेती के लिये मास्टर ट्रेनर तैयार करने का फैसला लिया है। "

-डॉ सुरेश गहलावत, अतिरिक्त निदेशक, कृषि विभाग

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