लॉकडाउन ने बांधे थे पंख, अब खुलकर भरेंगे उड़ान

दिनेश भारद्वाज/ट्रिन्यू चंडीगढ़, 29 जून

लॉकडाउन ने बांधे थे पंख, अब खुलकर भरेंगे उड़ान

लॉकडाउन ने जिन 8 ‘बाल गिद्धों’ के पंख बांध दिए थे, वे अब खुले आसमान में उड़ान भरने को तैयार हैं। बस, केंद्र की परमिशन का इंतजार है। केंद्र की मंजूरी मिलते ही इन गिद्धों को पिंजरे से बाहर छोड़ दिया जाएगा। पिंजौर के जोधपुर गांव स्थित गिद्ध संरक्षण प्रजनन केंद्र में पैदा हुए इन गिद्धों को आजादी का इंतजार है। फरवरी-मार्च माह में ही इन्हें उड़ान भरनी थी लेकिन लॉकडाउन की वजह से कार्यक्रम बीच में ही रोक दिया। अब राज्य के वन एवं वन्य जीव विभाग की ओर से फिर से इसकी प्रक्रिया शुरू कर दी है। कोशिश है कि केंद्रीय मंत्री की मौजूदगी (डिजिटल ही सही) में गिद्धों को पिंजरे से बाहर किया जाए। केंद्र से इसके लिए परमिशन मांगी गई है। केंद्र की मंजूरी बिना गिद्धों को उड़ाया नहीं जा सकता। प्रजनन केंद्र द्वारा इन आठ गिद्धों में ट्रांसमीटर लगाया जा चुका है। यही नहीं, पड़ोसी राज्यों के साथ भी बातचीत जारी है। प्रजनन केंद्र की स्थापना करने का फैसला 2004 में लिया गया था। इसके बाद हुड्डा सरकार के पहले कार्यकाल में वन एवं वन्य जीव मंत्री होने के नाते किरण चौधरी ने इस प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाया। वे केंद्र से इसके लिए ग्रांट लाने में भी कामयाब रहीं। शुरुआत में यहां अलग-अलग प्रजातियों के 50 गिद्ध लाए गए। वंशवृद्धि के बाद इनकी संख्या बढ़कर 350 पहुंच हो चुकी है। गिद्ध प्रजनन केंद्र की स्थापना करने की जरूरत भी 1995 में उस समय महसूस हुई थी, जब गिद्धों के मरने की खबरें आनी शुरू हुई। देशभर में गिद्धों की संख्या लगातार घट रही थी। वर्तमान में जिन आठ गिद्धों को उड़ान भरनी है, उनमें ट्रांसमीटर लगाए गए हैं। इन पर लगभग 44 लाख रुपये की लागत आई है। ट्रांसमीटर के लिए पहले टेली-कम्युनिकेशन और डिफेंस मिनिस्टरी की परमिशन ली गई। अब विभाग इन्हें उड़ाने के लिए पूरी तरह से तैयार है।

पड़ोसी राज्यों का सहयोग जरूरी आमतौर पर जब गिद्ध उड़ान भरते हैं तो वे 100 किमी. के दायरे में ही रहते हैं। इसलिए पिंजौर से जब ये गिद्ध उड़ान भरेंगे तो हरियाणा को पंजाब, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड व उत्तर प्रदेश सरकार के सहयोग की जरूरत रहेगी। गिद्ध 100 किमी. के दायरे में रहकर ही अपने लिए खाना तलाशता है। वन्य प्राणी विभाग के डिप्टी कंजर्वेटर ऑफ फॉरेस्ट श्याम सुंदर शर्मा का कहना है कि विभाग ने इन सभी राज्यों के अधिकारियों से बातचीत की है। उनसे यह भी जाना गया है कि उनके एरिया में कहां-कहां बूचड़खाने, डंपिंग ग्राउंड, कूड़ादान केंद्र तथा मृत पशुओं की खाल उतारने के काम होते हैं।

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