मुआवजा लौटाने के बाद ही मिलेगा कब्जा

चंडीगढ़, 25 जून (ट्रिन्यू) विवादों में घिरी दादुपुर-नलवी नहरी योजना का पटाक्षेप करते हुए राज्य सरकार ने भू-मालिकों को उनकी जमीन लौटाने का निर्णय लिया है। मंगलवार को चंडीगढ़ में हुई कैबिनेट बैठक में नहरी योजना निर्माण के लिए अधिग्रहित की गई भूमि का नोटिफिकेशन रद्द करने का निर्णय लिया गया। सरकार ने दो-टूक कहा है कि यह योजना गैर-लाभकारी और पूरी तरह से अव्यावहारिक है। ऐसे में अब इसे आगे बढ़ाने का कोई औचित्य नहीं। कैबिनेट द्वारा 27 सितंबर, 2017 को योजना को डि-नोटिफाई करने का निर्णय लिया गया था और 3, अगस्त 2018 को 824.71 एकड़ भूमि की अधिसूचना रद्द कर दी थी। इसके बाद किसानों को वैकल्पिक भूमि की पेशकश करके 11 दिसंबर, 2018 की अधिसूचना के तहत और 5.39225 एकड़ भूमि की अधिसूचना को रद्द कर दिया गया। कैबिनेट ने स्पष्ट किया है कि भूमि मालिकों या उनके कानूनी उत्तराधिकारियों को जमीन का कब्जा तभी दिया जाएगा जब वे मुआवजा राशि लौटाएंगे। यही नहीं, मुआवजा लौटाने की तिथि तक मुआवजे पर 9 प्रतिशत प्रतिवर्ष की दर से साधारण ब्याज भी देना होगा। भूमि अधिग्रहण अधिकारी अम्बाला के पास मुआवजा जमा करवाना होगा। सरकार ने उन भूमि मालिक किसानों का साधारण ब्याज माफ करने का भी निर्णय लिया है, जो अधिग्रहण के बाद सरकार द्वारा उपयोग जैसे किसी उपयोग या क्षति तथा भूमि की बहाली (रेस्टोरेशन) के कारण होने वाली क्षति के लिए मुआवजे का दावा नहीं करेंगे।

ग्रुप-डी के लिए बनेंगे सेवा नियम कैबिनेट ने कर्मचारी राज्य बीमा स्वास्थ्य देखभाल निदेशालय के ग्रुप-डी (फील्ड स्टाफ), सेवा नियम-2019, ग्रुप-डी (मुख्यालय) और कर्मचारी राज्य बीमा स्वास्थ्य देखभाल निदेशालय, हरियाणा, ‘निदेशालय लिपिकीय’, ग्रुप-बी सेवा नियम-2019 तैयार करने को भी मंजूरी दी है। इन नियमों को हरियाणा ग्रुप-डी कर्मचारी (भर्ती एवं सेवा शर्तें) अधिनियम-2018 के साथ रखा गया है। इससे विभागों में आयु, शैक्षणिक योग्यता और भर्ती की विधि समान रूप से लागू होगी।

2 पदों पर होगी सीधी भर्ती मंत्रिमंडल की बैठक में प्रबंधन प्रशिक्षु/प्रबंधक (विपणन) के दो पदों को सीधी भर्ती के माध्यम से अपने स्तर पर और अपनी आवश्यकतानुसार भरने के हरियाणा राज्य औद्योगिक एवं आधारभूत संरचना विकास निगम (एचएसआईआईडीसी) के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है। मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक चयन कमेटी गठित की गई है। इसमें एचएसआईआईडीसी के चेयरमैन, एचएसआईआईडीसी के प्रबंध निदेशक, उद्योग एवं वाणिज्य विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव और उद्योग एवं वाणिज्य विभाग के निदेशक इसके सदस्य होंगे।

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