धान के कटोरे में लगेगा मक्का और दलहन-तिलहन

  • ढाई लाख एकड़ के किसानों ने खुद ही आगे आते हुए धान उत्पादन से तौबा
  • 937 किसान रिचार्ज शॉफ्ट लगवाने को तैयार, 1000 का था टारगेट
  • सवा 3 लाख रुपये की शॉफ्ट, किसान को देने होंगे महज 10 हजार
  • भू-जल स्तर को ऊंचा उठाने के लिए राज्य सरकार की नई योजना
दिनेश भारद्वाज ट्रिब्यून न्यूज सर्विस चंडीगढ़, 3 जुलाई धान का कटोरा कहे जाने वाले एरिया में अब मक्का, दलहन और तिहलन की पैदावार होगी। बेशक, सरकार के पास ‘मेरा पानी-मेरी विरासत’ योजना के बाद भी किसानों को धान की खेती करने से रोकने के अधिकार नहीं हैं। लेकिन फिर भी राज्य के ढाई लाख एकड़ के किसानों ने खुद ही आगे आते हुए धान उत्पादन से तौबा कर ली है। खुद किसान भी चाहते हैं कि वे परंपरागत खेती की बजाय फसलों के विविधिकरण की ओर बढ़ें। फसली ट्रेंड को बदलने के लिए कमर कसने वाले इन किसानों के अलावा एक अच्छी खबर यह है कि भूमिगत जल रिचार्जिंग के लिए सरकार द्वारा बनाई गई नई योजना को किसानों ने हाथों-हाथ लिया है। सरकार ने राज्य में 1000 रिचार्जिंग शाफ्ट लगाने टारगेट तय किया। बड़ी बात यह है कि अभी तक 937 किसान शाफ्ट के लिए आवेदन कर चुके हैं। यह योजना उन एरिया के लिए है, जहां का भूजल स्तर काफी नीचे जा चुका है। जिन किसानों ने आवेदन किया है अब कृषि विभाग उनके खेतों में शॉफ्ट लगाने की प्रक्रिया पर आगे बढ़ चुका है। शाफ्ट के जरिये बारिश का पानी बेकार जाने की बजाय सीधे जमीन में जा सकेगा। इससे जमीन का जलस्तर बढ़ेगा। एक शाफ्ट पर लगभग सवा तीन लाख रुपये की लागत आएगी। किसान को महज 10 हजार रुपये देने होंगे। बाकी खर्चा राज्य सरकार वहन करेगी। पहले चरण में वे इलाके चिह्नित किए हैं, जो डार्कजोन में हैं और बारिश के दिनों में बाढ़ का खतरा भी हो जाता है। अभी भी आवेदन कर सकते हैं किसान सरकार ने रिचार्ज शाफ्ट के लिए किसानों से ऑनलाइन पोर्टल पर आवेदन मांगे थे। 1000 किसानों के खेतों में रिचार्ज शाफ्ट लगनी हैं। अभी तक 937 किसानों के आवेदन आ चुके हैं। ऐसे में सरकार अपना टारगेट करीब-करीब पूरा कर चुका है। यह संख्या अभी और भी बढ़ेगी। ऑनलाइन पोर्टल खुला हुआ है और किसान आवेदन कर सकते हैं। भूमिगत जलस्तर 20.71 मीटर तक गिरा हरियाणा के कुछ एरिया में भूमिगत जलस्तर 20.71 मीटर तक नीचे जा चुका है। 1974 से 2019 तक हरियाणा में भू-जल स्तर 10.65 मीटर नीचे गया है। विभागीय आंकड़ों के अनुसार 1984 से 2019 तक यह 10.19 मीटर, वर्ष 1995 से 2019 तक 9.17 मीटर, वर्ष 2008 से 2019 तक 5.22 मीटर, वर्ष 2018-19 तक 0.54 मीटर पानी नीचे गया है। सीजन 2019 जून से अक्तूबर तक 0.23 मीटर पानी में सुधार हुआ है और यह इस अवधि में नीचे की बजाए ऊपर आया है। ‘मेरा पानी-मेरी विरासत’ योजना के तहत एक लाख हैक्टेयर यानी ढाई लाख एकड़ किसानों ने धान की बजाय दूसरी खेती करने का मन बनाया है। ये कपास, बाजरा, मक्का, ज्वार व दलहन-तिलहन आदि की खेती करेंगे। क्या कहता है विभाग कृषि विभाग के अतिरिक्त सचिव -संजीव कौशल ने बताया कि जो किसान अभी जब रिचार्जिंग शाफ्ट के लिए आवेदन कर चुके हैं, उनके खेतों में शाॅफ्ट लगाने की प्रक्रिया जल्द शुरू कर दी जाएगी। सिंचाई विभाग को जल्द टेंडर के लिए कहा गया है ताकि निर्माण कार्य शुरू हो सेक। इसी मानसून सीजन में इसे सिरे चढ़ाने की कोशिश है ताकि बारिश के पानी को सीधे जमीन में पहुंचाया जा सके।

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