105 वर्षीय अम्मा ने दी चौथी की परीक्षा

कोल्लम में 105 साल की भागीरथी अम्मा को सम्मानित करने उनके घर पहुंचे केरल साक्षरता मिशन के एक अधिकारी। -प्रेट्र

तिरुवनंतरपुरम, 20 नवंबर (एजेंसी) पढ़ने की कोई उम्र नहीं होती, इसकी शुरुआत कभी भी हो सकती है, बस ललक होनी चाहिए। लिहाजा, बचपन से पढ़ने की अपनी ख्वाहिश केरल की भागीरथी अम्मा ने 105 साल की उम्र में पूरी कर मिसाल कायम कर दी है। भागीरथी अम्मा ने राज्य साक्षरता मिशन के तहत चौथे वर्ग के बराबर की परीक्षा में हिस्सा लिया है। उन्हें अपनी मां की मौत की वजह से अपना यह सपना छोड़ना पड़ा क्योंकि इसके बाद भाई-बहनों की जिम्मेदारी उन पर आ गई थी। इन सभी चीजों से जब वह उबरीं तब तक 30 साल की उम्र में उनके पति की मौत हो गई और फिर 6 बच्चों की जिम्मेदारी उन पर ही आन पड़ी। जब वह कोल्लम स्थित अपने घर में चौथी कक्षा के समतुल्य परीक्षा दे रही थीं तो वह महज परीक्षा ही नहीं दे रही थीं बल्कि एक मिसाल भी कायम कर रही थीं। साक्षरता मिशन निदेशक पीएस श्रीकला ने बताया कि अम्मा केरल साक्षरता मिशन के अब तक के इतिहास में सबसे बुजुर्ग ‘समकक्ष शिक्षा हासिल करने वाली’ व्यक्ति हैं। मिशन विशेषज्ञ वसंत कुमार ने बताया कि भागीरथी अम्मा को लिखने में दिक्कत होती है इसलिए उन्होंने पर्यावरण, गणित और मलयालम के तीन प्रश्नपत्रों का हल तीन दिन में लिखा है और इसमें उनकी छोटी बेटी ने मदद की है। इस उम्र में भी उनकी याद्दाश्त तेज है, नजर ठीक है और वह बहुत अच्छे से गा लेती हैं। अम्मा के पास आधार कार्ड नहीं है इसलिए उन्हें न तो विधवा पेंशन मिलती है और न ही वृद्धा पेंशन मिलती है।

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