हिंदी फीचर फिल्म हाफ़ टिकट

फ्लैशबैक

शारा हाफ़ टिकट 1962 में रिलीज ऐसी रोमांटिक कॉमेडी फिल्म है जो हिंदी की क्लासिक फिल्मों में बराबर अपनी जगह बनाए हुए है। कॉमेडी ऐसी कि कहीं भोंडापन नजर नहीं आता। फ्लैश बैक के पाठक समझ ही गये होंगे कि यह किसकी फिल्म हो सकती है? जी हां, सही समझे। यह आठ बार फिल्म फेयर विजेता और गीतों को गायिकी में नया मुहावरा देने वाले किशोर कुमार की फिल्म थी, जिसमें उनके साथ थीं उनकी पत्नी मधुबाला, जिन्हें बॉलीवुड की मर्लिन मुनरो कहा जाता है। मधुबाला की खूबसूरती का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि मधुबाला के खूबसूरत व दिलकश जलवों की फोटोग्राफी करने की खातिर हॉलीवुड के जाने-माने फोटोग्राफर जेम्स बुर्के को 1951 में आना पड़ा था। यह तब की बात है जब बॉलीवुड ऐसा बॉलीवुड नहीं था। हॉलीवुड के सामने बॉलीवुड अभी परवाज़ भरने के लिए पंख ही पसार रहा था। जेम्स बुर्के ने तब मधुबाला की लाइफ मैगजीन के लिए तस्वीरें ली थीं और छापा भी उन्हें तरजीह देकर। मधुबाला की दिलकश हंसी को लाइफ मैगजीन ने और भी चर्चित बना दिया, परंतु इस वक्त बात ‘हाफ़ टिकट’ पर। किशोर कुमार के अभिनय से तराशी इस फिल्म को निर्देशित किया था कालीदास ने और संगीत दिया था सलिल चौधरी ने। जिन कॉमेडी के गानों को रोमांस की छौंक लगी हो, उन्हें कलमबद्ध करना भी किसी चुनौती से कम नहीं था। और इस चुनौती को स्वीकार किया शैलेन्द्र ने। फिल्म में किशोर का सिर्फ अभिनय ही हो, ऐसी बात नहीं है। उन्होंने अधिकतर गाने अपने आप गाये हैं। खासकर ‘आके सीधी लगी मेरे दिल में’ गीत को उन्होंने महिला व पुरुष की आवाज दोनों में गाया है। उनका संगीत में यह तजुर्बा उस वक्त काफी चर्चित रहा था। समूची फिल्म में शायद ही दर्शक किसी सीन में बोर हुआ हो। यही उनके अभिनय में जो वर्सेटैलिटी थी, फिल्म को दर्शकों के काफी करीब ले गयी। आये तो सिंगर बनने के लिए थे, लेकिन भाई अशोक कुमार उन्हें एक्टर बनाने के लिए वाज़िद थे। बाद में तो वह सुरों से प्रयोग ही प्रयोग करते रहे। फिल्म ने अच्छी कमाई की। इस फिल्म को प्रोड्यूस किया था बॉम्बे टॉकीज ने। देविका व हिमांशु राय के इस प्रोडक्शन हाउस में अशोक कुमार भी संस्थापकों में से एक थे। वह उन्हीं की प्रोड्यूस की गयी फिल्मों में अभिनय भी किया करते थे। जब देविका रानी ने फिल्मी लाइन को अलविदा कहा तो इस प्रोडक्शन हाउस को शशाधर मुखर्जी ने खरीद लिया। शशाधर मुखर्जी को अशोक कुमार की बहन ब्याही हुई है तो किशोर कुमार तो अशोक कुमार के भाई थे। हाफ़ टिकट में अमीर उद्योगपति के नकचढ़े साहबजादे विजय को अपने बाप की बात-बात में दखलअंदाजी पसंद नहीं और न ही उन्हें यह पसंद है कि उनके परिवारवाले उन्हें शादी करके सैटल करने के लिए मजबूर करें। बाप की रोजाना चख-चख से तंग आकर विजय घर छोड़कर बम्बई के लिए निकल पड़ता है ताकि वह अपनी जिंदगी जी सके, लेकिन उसके पास इतने पैसे नहीं कि अपना टिकट खरीद सके। टिकट लेने के लिए लाइन में लगी टुनटुन के बेटे मुन्ना पर उसकी नजर पड़ती है जो मोटा होने के कारण मुन्ना कम बंदा ज्यादा लगता है। वैसे भी टुनटुन का बेटा कैसा हो सकता है? विजय उसकी जगह ले लेता है और हाफ़ टिकट लेकर गाड़ी में बैठ जाता है लेकिन बच्चा समझ कर हीरे का स्मगलर बना प्राण उसकी जेब में हीरे सरका देता है। अपनी जेब में हीरों से बेखबर विजय का ट्रेन में ही रजनी देवी से इश्क चलता है। रजनी देवी का रोल मधुबाला ने किया है। इसके बाद विजय का शोषण शुरू हो जाता है जब प्राण अपनी गर्लफ्रेंड के साथ मिलकर अगवा करना चाहता है। लेकिन वह हर बार कैसे बच निकलता है? वह रजनी से मुहब्बत तो करता है लेकिन उसकी आंटी मनोरमा से बचता-बचाता है और आखिर में किस तरह अपने पिता से जा मिलता है। गीत चांद रात तुम हो साथ : लता मंगेशकर, किशोर कुमार आंखों में तुम : गीता दत्त, किशोर कुमार चिल चिल चिल्ला के : किशोर कुमार वो एक निगाह क्या मिली : लता मंगेशकर, किशोर कुमार आके सीधे लगी दिल पे : किशोर कुमार (दोनों युगल स्वर) अरे ले लो जी ले लो : किशोर कुमार अरे वाह रे मेरे मालिक : किशोर कुमार निर्माण टीम निर्देशक : कालीदास प्रोड्यूसर : बॉम्बे टॉकीज पटकथा व संवाद : सुहृद कार व रमेश पंत गीत : शैलेन्द्र संगीत : सलिल चौधरी सिनेमैटोग्राफी : अपूर्वा भट्टाचार्य सितारे : किशोर कुमार, मधुबाला, प्राण, हेलेन, मनोरमा, टुनटुन आदि

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