सेहत का नमक

ललित शौर्य

पारस मम्मी-पापा के साथ शहर में रहता था। उसके दादाजी और दादीजी गांव में रहते थे। पारस छुट्टियों में गांव जाया करता था। उसे गांव की खुली हवा, वातावरण, हरियाली और नदी बहुत लुभाती थी। स्कूल में कुछ दिन की छुट्टियां पड़ी थी। पारस ने मम्मी से कहा, 'मम्मी मैं यहां बोर हो रहा हूं। क्या कुछ दिन के लिए गांव जा सकता हूं।' 'तुम्हें तो हर दूसरे दिन गांव जाने की सूझती है। कुछ रिवीजन ही कर लो।', मम्मी ने कहा। 'मम्मी प्लीज, चार महीने से गांव नहीं गया। बस 5 दिन की ही तो बात है। मैं अपनी बुक्स भी गांव ले जाऊंगा। वहां पढ़ाई भी करूंगा। ' पारस ने कहा। 'चलो ठीक है। मैं पापा से बोल दूंगी। वो कल सुबह तुम्हें गांव वाली बस में बिठा देंगे।'-मम्मी बोली। पारस खुशी से उछल पड़ा। उसने मम्मी को थैंक्स बोलते हुए गले से लगा लिया। अगली सुबह पापा ने पारस को बस में बिठाया। गांव में पारस के दादाजी को फोन कर दिया था। दादाजी ठीक समय पर बस स्टैंड आ चुके थे। पारस दादाजी को देखकर बहुत खुश हुआ। उसने दादाजी के पैर छुए। दादाजी ने पारस को गले लगाकर ढेर सारा आशीर्वाद दिया। दादाजी ने पारस का बैग पकड़ा और घर की ओर चल दिये। घर पहुंचकर पारस ने दादीजी के पैर छुए। उन्हें गले से लगा लिया। दादीजी पारस के लिए खाना बना रही थी। पारस फ्रेश होने चला गया। उसने कपड़े बदले, हाथ मुंह धो लिया। उसके बाद खाना खाया। पारस खाना खाकर बाहर आया तो दादाजी गाय को पानी दे रहे थे। वो पानी में नमक डाल रहे थे। पारस ने पहली बार इतना मोटा नमक देखा था। 'दादाजी ये कौन सा नमक है? क्या आप भोजन में भी यही नामक प्रयोग करते हैं।' पारस ने पूछा। 'ये मोटा नमक है। इसका प्रयोग सिर्फ जानवरों के लिए ही करते हैं। इस नमक में आयोडीन नहीं होता, इसलिए इसे भोजन में प्रयोग नहीं करते। भोजन में प्रयोग के लिए किचन में अलग से आयोडीन नमक रखा हुआ है।' दादाजी ने बताया। 'ओह्ह। ऐसी बात है। आयोडीन नमक ही भोजन में प्रयोग क्यों करते हैं।' पारस ने पूछा। 'बेटा आयोडीन हमारे शरीर के लिए अत्यंत आवश्यक है। ये हमारे बाल, नाखून, त्वचा के लिए भी बहुत जरूरी है। आयोडीन की कमी से अनेक रोग हो सकते हैं।', दादाजी ने बताया। 'रोग भी हो सकता है। कौन-सा रोग दादाजी', पारस ने आश्चर्य से पूछा। 'आयोडीन की कमी से घेंघा रोग हो जाता है। इससे गल ग्रंथि बढ़ जाती है। गले में उभार-सा दिखने लगता है। इसकी कमी से मनुष्य का मस्तिष्क भी कमजोर हो जाता है।' दादाजी ने बताया। 'दादाजी आयोडीन को नमक में क्यों मिलाया जाता है। क्या हम इसकी टेबलेट नहीं खा सकते?', पारस ने पूछा। 'जरूर। इसकी टेबलेट भी खाई जा सकती है। पर हमें वो टेबलेट जिंदगी भर खानी पड़ेगी। इसीलिए आयोडीन को नमक में मिलाया जाता है क्योंकि हम नमक हर रोज प्रयोग करते हैं। ' दादाजी ने बताया। 'हमें एक दिन में कितने आयोडीन की ज़रूरत पड़ती है। इसके अन्य स्रोत भी हैं क्या?' पारस ने प्रश्न किया। 'ये मिट्टी में भी पाया जाता है। जो सब्जियों के माध्यम से हमारे शरीर में जाता है। लेकिन कुछ स्थानों की मिट्टी में आयोडीन नहीं होता, जिससे वहां उगाई गई सब्जियों में इसका आभाव होता है। तभी हमें नमक में आयोडीन लेना पड़ता है। हमें हर रोज बस सूई की नोक के बराबर लगभग 150 माइक्रोग्राम आयोडीन की ज़रूरत होती है। अगर हिसाब लगाएं तो जीवन में एक छोटे चम्मच के बराबर।' दादाजी ने बताया। 'बस इतना सा। तो हम एक साथ एक चम्मच आयोडीन क्यों नहीं ले लेते।' पारस ने पूछा। 'क्या तुम एक महीने का खाना एक साथ खा सकते हो। नहीं ना। तो जीवन भर का आयोडीन एक दिन में कैसे ले सकते हो। हमें नियमित प्रतिदिन आयोडीन की पर्याप्त मात्रा लेनी होती है।' दादाजी ने हंसते हुए जवाब दिया। 'ओह्ह तो ये बात है। ' पारस बोला। 'हां यही बात है। आज भी हमारे देश में बहुत सारे लोग आयोडीन नमक का प्रयोग नहीं करते, जिससे वो विभिन्न प्रकार के रोगों की गिरफ्त में आ जाते हैं। हमें जागरूकता फैलानी चाहिए। आयोडीन युक्त नमक ही प्रयोग करना चाहिए।' दादाजी बोले। 'हां। आयोडीन युक्त नमक ही सर्वोत्तम है।',पारस बोला, और जोर से हंस दिया। दादीजी आवाज देते हुए बोली, 'यहीं खड़े-खड़े बात करोगे या पारस को गांव भी घुमाओगे।' दादाजी पारस से बोले, 'चलो-चलो गांव की ओर चलते हैं। नहीं तो और ज्यादा डांट पड़ेगी।' पारस ये सुनकर ठहाके मारकर हंसने लगा। अब उसे गांव घूमने की उत्सुकता थी।

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