सड़कों पर ही दनदनाएंगे आवारा कुत्ते

शिमला, 11 मई (निस)। हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला के पांच हजार से अधिक आवारा कुत्तों को अब पिंजरे में बंद नहीं किया जा सकेगा। पशु कल्याण कानून इन आवारा कुत्तों के लिए संकट मोचक साबित हुआ है और नगर निगम शिमला तथा प्रदेश सरकार ने इन आवारा कुत्तों को पिंजरे में बंद करने से हाथ खड़े कर दिए हैं। यही नहीं इस संबंध में हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट द्वारा दिए गए निर्णय को अब प्रदेश सरकार और नगर निगम शिमला ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने का निर्णय लिया है और इस संबंध में निगम ने एसएलपी भी तैयार कर ली है तथा अगले एक सप्ताह में इसे सुप्रीम कोर्ट में दाखिल कर दिया जाएगा। राजधानी शिमला में इस समय आवारा कुत्तों की संख्या लगभग पांच हजार तक पहुंच गई है। इनमें से अभी तक लगभग 4500 कुत्तों को स्टरलाईज़ कर दिया गया है तथा अभी भी स्ट्रे  डॉग बर्थ कंट्रोल सोसायटी हर महीने 100 आवारा कुत्तों को स्टरलाइज़ कर रही है। राजधानी में चूंकि आवारा कुत्ते दिनों दिन बढ़ रहे हैं और ये आवारा कुत्ते पालतू जानवरों के साथ-साथ स्थानीय निवासियों के लिए भी खतरनाक साबित हो रहे हैं । इसी के चलते प्रदेश हाईकोर्ट ने नगर निगम शिमला को इन आवारा कुत्तों के लिए डॉग शैल्टर बनाने के निर्देश दिए थे। बताते हैं कि नगर निगम शिमला ने प्रदेश सरकार की मदद से इस कार्य को अंजाम देने के लिए कार्यवाही आरंभ भी कर दी थी। मगर इसी दौरान नगर निगम द्वारा पशु कल्याण बोर्ड और अन्य संस्थाओं से ली गई राय के बाद निगम और सरकार ने आवारा कुत्तों को लेकर अपनी राय बदल ली है। नगर निगम शिमला के आयुक्त एएन शर्मा का कहना है कि पशु कल्याण कानून के प्रावधानों के मुताबिक नगर निगम अथवा प्रदेश सरकार आवारा कुत्तों को पिंजरे में कैद नहीं कर सकती। उनका कहना है कि  पशु कल्याण कानून के मुताबिक आवारा कुत्तों को केवल उन्हें स्टरलाईज़ करने के लिए पकड़ा जा सकता है और ऑपरेशन करने तक ही उन्हें पिंजरे में रखा जा सकता है तथा इसके उपरांत इस तरह के कुत्तों को उनके पकडऩे के स्थान पर छोडऩा जरूरी है। उन्होंने कहा कि इसी के चलते तथा पशु कल्याण कानून के अध्ययन के उपरांत नगर निगम और प्रदेश सरकार ने प्रदेश हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने का निर्णय लिया है और इस संबंध में एक एसएलपी तैयार की गई है। नगर निगम शिमला ने शिमला-कालका सड़क पर बैरियर के नीचे पांजड़ी नामक स्थान पर डॉग शैल्टर और पशु औषधालय के निर्माण के लिए जगह चिह्निïत की है। इसमें से 2000 वर्ग मीटर डॉग शैल्टर के लिए तथा 400 वर्ग मीटर जगह अस्पताल के लिए आबंटित की गई है। इस कार्य के लिए प्रदेश सरकार ने नगर निगम को 30 लाख रुपए की राशि भी जारी की है और अब इस पर काम आरंभ होने वाला है। राजधानी में आवारा कुत्तों के स्टरलाइजेशन के कार्य में लगे डा. अरुण सरकेक का कहना है कि जब तक पूरे जिला में आवारा कुत्तों को स्टरलाइज करने का संगठित कार्यक्रम नहीं चलाया जाता तब तक राजधानी में आवारा कुत्तों की संख्या नियंत्रित कर पाना मुश्किल है। शिमला में आवारा कुत्तों को स्टरलाईज करने का कार्य एक डाक्टर और सात कर्मचारियों की टीम देख रही है। इसी टीम के हवाले कुत्तों को पकडऩा उन्हें एम्बूलेंस में डालकर स्टरलाइजेशन केंद्र तक लाना और फिर छोडऩा भी शामिल है।

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