सकारात्मकता से आती है सौम्यता

शिखर जैन

कभी-कभी हम अपने स्वभाव व लोगों के साथ पेश आने के गलत तरीके के कारण ट्रोल हो जाते हैं। व्यवहार में पॉज़िटिविटी न हो तो हर रोज़ किसी न किसी से खटपट हो जाती है और अपना भी मूड ऑफ हो जाता है। ज़रूरी है सौम्य रहें, ऐसा तभी होगा जब सकारात्मक सोच रखेंगे।

गुस्से में न करें बात कई बार आपका मूड किसी कारण से ऑफ रहता है। ऐसे में मन में झुंझलाहट सी रहती है और किसी की सामान्य बात भी आपको बुरी लगती है। इस स्थिति में आप किसी से ज्यादा बात न करें तो बेहतर है।

पॉजि़टिव पहलू पहले बताएं चाहे आपके अधीन काम करने वाले लोग हों, क्लाइंट, कोई भी परिचित हों, सबसे पहले उनकी गलतियां या कमियां गिनाने न बैठ जाएं। पहले उन्हें अच्छी चीजों के लिए सराहें, फिर गलती या नेगेटिव पहलू की ओर उनका ध्यान आकृष्ट करें। इससे उन्हें आपकी बात जल्दी समझ में आएगी।

बेइज्ज़ती न करें गलती किसी से भी हो सकती है। माना कि किसी की गलती की वजह से आपको कुछ तकलीफ या नुकसान हुआ होगा, लेकिन इसके लिए किसी को बेइज्जत करना ठीक नहीं। कठोर शब्दों से आपकी तकलीफ या नुकसान की भरपाई तो नहीं होगी बल्कि सामने वाले से रिश्ते में हमेशा के लिए दरार पड़ जाएगी।

अपनी गलती को मानें कई बार आप से जाने-अनजाने में किसी के प्रति गलत व्यवहार हो जाता है या किसी कार्य में गलती हो जाती है। ऐसे में तरह-तरह के बहाने बनाने, दूसरों पर अपनी गलती थोपने या अपनी गलती छिपाने के लिए और भी गलतियां करने से बेहतर है कि आप अपनी गलती मान लें और संबंधित व्यक्ति से क्षमा मांग लें। इससे न सिर्फ आपके दिल का बोझ हल्का होगा बल्कि आपकी छवि लोगों के सामने बेहतर होगी।

सामने वाले को कहने दें कई लोग जब बोलना शुरू करते हैं तो सिर्फ खुद ही बोलते रहते हैं और दूसरों को बोलने का मौका ही नहीं देते। ऐसे लोगों से मिलना कोई पसंद नहीं करता। लोगों से कनेक्ट रहने, अच्छे रिलेशन बनाने का सही तरीका यह है कि आप उन्हें अपने मन की बात अच्छी तरह कहने दें।

अभिवादन करें किसी व्यक्ति से मिलें तो सबसे पहले मुस्कुराएं। आप चाहे कितने ही गंभीर मुद्दे पर बात करने वाले हों पर मिलते ही मुस्कुराने और अभिवादन करने के सामान्य शिष्टाचार का पालन अवश्य करें। इससे आपकी बातचीत सफल होने व किसी विवाद के आसानी से सुलझने के आसार बढ़ते हैं।

बहस न करें बहस से समस्या का निदान नहीं होता। इससे सिर्फ मनमुटाव होता है। इसलिये सौम्यतापूर्वक विमर्श करें।

ऐसे बिगड़ते हैं संबंध

  • स्वार्थ की अत्यधिक भावना।
  • शिष्टाचार की कमी और रूख़ा व्यवहार।
  • लोगों के साथ लापरवाही वाला व्यवहार।
  • वादों को पूरा न करना।
  • ईमानदारी और सच्चाई का अभाव।
  • अड़ियल और अहंकारी स्वभाव।
  • घटिया नज़रिया और बंद दिमाग।
  • लोगों की बात को ध्यान से न सुनना।
  • शक्की स्वभाव और उतावलापन।
  • नैतिक मूल्यों को तवज्जो न देना।
  • अनुशासनहीनता और क्रोध।
  • लालच और हेराफेरी की आदत।

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