संकल्प

बाल कहानी इंद्रजीत कौशिक

सुंदरवन में जानवरों की छुट्टियां हो गई थीं। छुट्टियां होने से पहले स्कूल में टीचर जी ने सभी बच्चों से कहा कि वे इन छुट्टियों में कोई नई बात सीखें। सुरीली कोयल वैसे तो गाना अच्छा गाती थी पर उसने भी तय किया कि इन छुट्टियों में वह अपने गाने की क्वालिटी को और सुधारेगी। क्रो-क्रो कौवे ने भी सुरीली से गाने के टिप्स लेने का संकल्प लिया। जंपी बंदर दिखने में काफी कमजोर नजर आता था। उसने जिम जाकर अपने शरीर को मजबूत बनाने का फैसला किया। जंबो हाथी ने खुद को बदलने का निर्णय किया और तय किया कि वह हर किसी की मदद करेगा। तेजू लोमड़ी और ब्राउनी सियार ने लोगों को बेवकूफ बनाने की अपनी आदत को बदलने का निश्चय कर लिया। ढेंचू गधे ने सोच लिया कि वह अपनी बेवकूफियों को छोड़कर कुछ समझदार बनने की कोशिश करेगा। इस तरह सुंदरवन के सभी बच्चों ने अपने-अपने संकल्पों पर अमल करना शुरू कर दिया। जंगल में बरगद का एक विशाल पेड़ था, उस पेड़ के नीचे सबने इकट्ठे होकर अपनी-अपनी विधाओं को मजबूत बनाने का काम शुरू कर दिया। चुनमुन चिड़िया ने प्रस्ताव रखा कि नया काम शुरू करने से पहले सभी को तालाब में स्नान कर लेना चाहिए। सब मिलकर तालाब की तरफ चल दिए। तालाब के पास पहुंचकर उन सबकी आंखें फटी की फटी रह गईं। तालाब में पानी नहीं के बराबर बचा था और जितना था, वह भी गंदा हो चला था। ‘आओ बच्चो आओ, तुम्हारा इस जगह पर स्वागत है।’ तालाब में से मगरमच्छ ने अपना मुंह बाहर निकालते हुए बच्चों का स्वागत किया।’ ‘अंकल, ऐसे गंदे पानी में तुम कैसे रह रहे हो, हमारी समझ में तो कुछ नहीं आ रहा?’ सारे बच्चों ने एक स्वर में मगरमच्छ से पूछा। ‘बच्चो, मैं इन छुट्टियों में तुम्हारे संकल्पों के बारे में सुन चुका हूं। खाली समय का सदुपयोग करना बहुत अच्छी बात है। अगर तुम चाहो तो मैं तुम्हें इन छुट्टियों में एक अच्छा कार्य करने की सलाह दे सकता हूं।’ ‘हां -हां अंकल, जरूर बतलाइए कि हम इन छुट्टियों का सदुपयोग कैसे करें!’ बच्चों ने मगरमच्छ से पूछा तो उसने अपनी व्यथा बताई। ‘सोच लो, अगर यही हाल रहा तो इस गंदे हो चुके तालाब के पानी को पीने से हम सभी लोग बीमार पड़ सकते हैं। अगर तुम सब लोग चाहो तो मिलकर इस तालाब को साफ करने का बीड़ा उठा लो।’ ‘अंकल आपकी बात बिल्कुल सही है। पूरे जंगल के लिए प्यास बुझाने और नहाने के लिए यही एक तालाब ही तो है। इससे साफ करना और स्वच्छ बनाए रखना हमारे खुद के अस्तित्व के लिए बहुत ही जरूरी है। हम सब अभी से इस तालाब को स्वच्छ बनाने के काम में जुटेंगे।’ जंपी बंदर ने कहा तो सबने उसकी बात का समर्थन किया। अब सवाल यह था कि तालाब की गंदगी और उसमें उगी हुई बेकार वनस्पतियों को कैसे हटाया जाए। गोरू खरगोश अपनी समझदारी के लिए जंगल भर में विख्यात था। उसकी सलाह मानकर जंपी बंदर ने बांस की एक बड़ी सी मजबूत टोकरी तैयार कर डाली। उसे नाव का रूप देकर तालाब में उतार दिया और उसमें 2 हल्के भार वाले जानवर सवार होकर तालाब की गंदगी को साफ करने निकल पड़े। दो दिन में कड़ी मेहनत से उन्होंने तालाब का कचरा निकाल कर बाहर इकट्ठा कर दिया। इसके बाद जंबो हाथी ने अपनी मजबूत सूंड से तालाब में उग आई बेकार की झाड़ियों को उखाड़ कर बाहर निकाल दिया। इस तरह हर छोटे-बड़े जानवर ने अपनी सामर्थ्य के अनुसार तालाब को साफ करने में अपना योगदान देकर एक सप्ताह में पूरा तालाब साफ कर डाला। तभी वहां कुछ जानवर आकर फिर से तालाब को गंदा करने लगे तो मगरमच्छ ने उनमें से एक का पांव अपने मुंह में दबा लिया। ‘मेरा पांव छोड़ो, बहुत दर्द हो रहा है।’ उसने मगरमच्छ से कराहते हुए विनती की तो मगरमच्छ ने उससे कहा कि अगर आइंदा कभी पानी को गंदा किया तो वह उसे छोड़ेगा नहीं। इस पर उन्होंने माफी मांगते हुए वचन दिया कि आइंदा कभी वे पानी को गंदा नहीं करेंगे। एक दिन स्कूल के टीचर जी तालाब की तरफ घूमने के लिए आए तो वहां का नजारा देखकर दंग रह गए। उनके सारे स्टूडेंट मिलकर तालाब की चारदीवारी को दुरुस्त करने में लगे थे। तालाब का पानी साफ-सुथरा नजर आ रहा था। यह दृश्य देखकर टीचर जी की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। ‘तुम लोगों ने तो कमाल कर दिखाया मेरे बच्चो, छुट्टियों का इससे अच्छा सदुपयोग भला क्या हो सकता है ! तुम सभी लोग बधाई के पात्र हो,तुम लोगों की लगन देखकर मुझे बहुत अच्छा लग रहा है।’ ‘सर, हमने तय किया है कि ना तो हम में से कोई इस तालाब के पानी को गंदा करेगा और ना ही किसी को करने देगा।’ जंपी बंदर और दूसरे बच्चों ने टीचर जी से कहा तो उन्होंने उन्हें खूब शाबासी दी। अभी उन बच्चों की बात पूरी हुई थी कि अचानक आकाश में बादल घिर आए और देखते ही देखते बरसात शुरू हो गई। बड़ी देर तक जमकर मेघों ने पानी बरसाया। बारिश का पानी तालाब में भर जाने से पूरा तालाब लबालब हो गया।। सुंदरवन के सारे प्राणी इस बात से बहुत प्रसन्न थे कि उन्हें अब पूरे साल पानी मिलता रहेगा, वह भी पूरी तरह स्वच्छ और साफ पानी। बच्चों की एक सार्थक पहल ने उनकी एक बड़ी चिंता को दूर कर दिया था। छुट्टियां अभी बाकी थी बच्चों की टोली अपने अधूरे संकल्पों को पूरा करने में जी जान से जुट गई।

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