विद्यालय जाने की खुशी

स्कूल में पहला दिन

विद्या 4 साल की थी मैं तब, मेरे माता-पिता ने मुझे स्कूल में दाखिल करवाने की प्रक्रिया शुरू कर दी थी। हर दिन घर पर लिखने और पढ़ने का अभ्यास करवाया जाता। इसके अलावा एक छोटा सा ब्लैक बोर्ड, स्लेट और कलर पेंसिल के साथ कुछ कलर बुक्स भी मुझे लाकर दी जाती थी। माता-पिता चाहते थे कि किसी तरह अच्छे स्कूल में बेटी का दाखिला हो जाये। फिर मार्च 1993 को जब मैं 5 वर्ष की हुई तो वह दिन आ ही गया जब मेरे पेरेंटस मुझे लेकर हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला के लॉरेटो कॉनवेंट स्कूल ताराहॉल में लेकर पहुंचे। माता-पिता इस बात से खुश थे कि राजधानी के सबसे पुराने गर्ल्स कॉनवेंट स्कूल में उनकी बेटी को दाखिला मिल रहा है। बहुत दुबली -पतली होने के कारण मेरे अभिभावक मुझे जल्दी स्कूल नहीं भेजना चाहते थे। इसलिये जब मैं स्कूल गई तो मुझे एलकेजी क्लास में दाखिला मिला। पहले दिन की याद कुछ इस तरह है कि स्कूल की इमारत देखकर मैं इतरा रही थी। रंग- बिरंगी ड्रैस में अपनी उम्र के बच्चों की तरफ इस आस से देख रही थी कि कोई तो आकर मुझसे बात करने की कोशिश करेगा। गुलाबी गालों वाली एक छोटी सी लड़की जिसका नाम िनरोशा था, अपनी कुछ और सहपाठिनों के साथ कैंपस के झूले पर झूल रही थी। माता-पिता जब तक बाकी प्रक्रिया पूरी करते, स्कूल में कार्यरत एक आंटी मुझे उस झूले तक ले गई। बस यहीं से निरोशा के साथ बातचीत और दोस्ती का सिलसिला शुरू हुआ, जो स्कूल के बाद कॉलेज और एक संस्थान में नौकरी करने तक कायम रहा। इसके बाद मुझे मेरी टीचर से मिलवाया गया। टीचर का नाम था नेहा। पहली ही नज़र में टीचर को देखकर मैं उनकी फैन हो गई। मेरी पहली टीचर जितनी सुंदर थी, उतनी ही मृदुभाषी और सौम्य भी। उन्होंने मुझे प्यार से अपने पास बुलाया और खूब दुलार किया। इतनी आत्मीयता दिखाई कि मैं स्कूल के नाम पर न तो घबराई, न किसी तरह का रोना-धोना किया। माता-पिता की सारी चिंता भी इसी बात से खत्म हो गई कि बेटी स्कूल के अंदर आते ही खुश हो गई। उस दिन मैं कुछ देर कक्षा में बैठकर बस टीचर और बच्चों को निहारती रही। पढ़ाई के नाम पर मुझे बहुत कुछ याद नहीं कि क्लास में कुछ काम भी करवाया गया था। अब हर दिन इसी कौतूहल में उठती कि स्कूल की वैन आ गई होगी, कब स्कूल पहुंचूंगी और अपनी क्लास में बैठूंगी। इसी तरह आगे के कई और साल इसी स्कूल में निकले और 12वीं की पढ़ाई मैंने पूरी की।

सब से अधिक पढ़ी गई खबरें

ज़रूर पढ़ें

बलिदानों के स्वर्णिम इतिहास का साक्षी हरियाणा

बलिदानों के स्वर्णिम इतिहास का साक्षी हरियाणा

सुशांत की ‘टेलेंट मैनेजर’ जया साहा एनसीबी-एसआईटी के सामने हुईं पेश

सुशांत की ‘टेलेंट मैनेजर’ जया साहा एनसीबी-एसआईटी के सामने हुईं पेश

किसानों की आशंकाओं का समाधान जरूरी

किसानों की आशंकाओं का समाधान जरूरी

मुख्य समाचार

कंपनियों को बंद करने की बाधाएं होंगी खत्म

कंपनियों को बंद करने की बाधाएं होंगी खत्म

तीन श्रम सुधार विधेयकों को संसद की मंजूरी

मानसून सत्र 8 दिन पहले समाप्त

मानसून सत्र 8 दिन पहले समाप्त

कृषि बिलों पर सियासी जंग अब जनता के बीच लड़ने की तैयारी

मुंबई में भारी बारिश, सड़क और रेल यातायात प्रभावित

मुंबई में भारी बारिश, सड़क और रेल यातायात प्रभावित

बंद रहे सभी कार्यालय, संस्थान

दीपिका, श्रद्धा, रकुलप्रीत और सारा अली खान तलब

दीपिका, श्रद्धा, रकुलप्रीत और सारा अली खान तलब

मादक पदार्थ केस में एनसीबी ने पूछताछ के लिए बुलाया