विजयादशमी अपराजिता-पूजन मुहूर्त

अश्विन शुक्ल पक्ष की दशमी को श्रवण नक्षत्र में विजयादशमी पर्व मनाने का शास्त्र सम्मत विधान है। दशमी तिथि 7 अक्तूबर को दोपहर 12.39 से 8 अक्तूबर को अपराह‍्न 2.50 बजे तक रहेगा, जबकि इस दिन श्रवण नक्षत्र रात 8.12 बजे तक है। ‘ज्योतिर्निबन्ध’ के अनुसार अपराह‍्न-व्यापिनी आश्विन शुक्ल दशमी के दिन विजयादशमी (अपराजिता-पूजन) होती है। आश्विन शुक्ल दशमी के सायंकाल में तारा उदय होने के समय ‘विजयकाल’ रहता है, इस दिन (दशहरा) हर प्रकार के कार्यों को सिद्ध करने वाला मुहूर्त होता है। इसीलिए विजयादशमी को ‘अणपुच्छ’ (स्वयं सिद्ध) मुहूर्त कहा गया है। इस दिन सुबह सभी देवी-देवताओं, अस्त्र-शस्त्राें और गुरुजनों का पूजन करें। इस दिन ‘शमी’ (जांटी या खेजड़ा) एवं अश्मन्तक (कोविदार या कचनार) का पूजन करने से ‘कार्य सिद्धि’ होती है। किंवदंती के अनुसार इस दिन ‘नीलकंठ’ पक्षी दिखना अतिशुभ होता है, इसे भगवान शिव का प्रतीक माना जाता है। इस दिन ‘पान का बीड़ा’ हनुमान जी को चढ़ाया जाता है। ‘पान’ जीत का प्रतीक भी है। ‘पान का बीड़ा’ शब्द का अर्थ कि हम जीवन में सही-सम्मानपूर्वक शुभ रास्ते पर चलने का बीड़ा उठाते हैं। विजयादशमी मुहूर्त : अपराह‍्न पूजन मुहूर्त- दोपहर 1.18 से 3.18 बजे तक, दशहरा विजय मुहूर्त- दोपहरबाद 2.05 से 2.52 बजे तक।

-सत्यव्रत बेंजवाल

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