वर्दी पहनने का इंतज़ार

चैनल चर्चा

प्रदीप सरदाना सोनी सब टीवी ने गत फरवरी में अपने यहां एक नया सीरियल शुरू किया था। ’मैडम सर’। महिला पुलिस कर्मियों की ज़िंदगी पर बना यह सीरियल शुरू में ही अच्छी ख़ासी चर्चा में आ गया था। लेकिन मार्च में शूटिंग रुकने से इसका प्रसारण रुक गया। सीरियल में एक जिस दिलकश अभिनेत्री ने अपनी अदाओं से सभी का दिल जीता, उसका नाम है युक्ति कपूर। युक्ति सीरियल में इंस्पेक्टर करिश्मा सिंह के अवतार में हैं। करिश्मा जहां एक ओर अपनी कडक भूमिका में एक्शन तक करती है, तो दूसरी ओर कॉमेडी में भी वह समां बांध देती है। युक्ति कहती है- ‘मैं यूं तो अपने घर पर रहकर खाली दिनों का सदुपयोग कर रही हूं। जिसमें अपनी हेल्थ फिटनेस के लिए भी मैं रोजाना खूब समय निकाल पा रही हूँ। लेकिन इस सबके बावजूद मुझे उस दिन का इंतज़ार है जब शूटिंग शुरू हो और मैं फिर से इंस्पेक्टर करिश्मा की पुलिस वाली यूनिफॉर्म पहन सकूं।’ अपनी हेल्थ फिटनेस के लिए युक्ति घर पर क्या क्या करती हैं ? यह पूछने पर युक्ति कहती हैं-’असल में शूटिंग के दौरान अपनी स्किन की देखभाल के लिए मेरे पास बिलकुल समय नहीं था। इसलिए अब सबसे पहले स्किन पर फोकस कर रही हूं। इसके लिए मैं सुबह सवेरे हल्दी वाले गुनगुना पानी लेती हूं। उसके बाद करीब 15 मिनट योग करती हूं। फिर अपने चेहरे पर अलग अलग किस्म के फेस पैक लगाती हूं। इधर मैंने अब खाने में चावल और रोटी खाना बंद कर दिया है। उसकी जगह सभी प्रकार की सब्जियां और दालें खूब खाती हूं। फिर मैंने अब रात के खाने के लिए भी एक नया रूटीन बनाया है, वह यह कि मैं रात का खाना शाम साढ़े 7 बजे खा लेती हूं। मैंने देखा है इस सबसे मैं खुद को हर दम फ्रेश और फिट महसूस करती हूं।’ कलर्स पर अब ‘ओम नमः शिवाय’ कलर्स चैनल 18 जून से सीरियल ‘ओम नमः शिवाय’ दिखाने जा रहा है। जिसका प्रसारण सोमवार से रविवार प्राइम टाइम में रात 9 बजे के समय में होगा। सीरियल ‘ओम नमः शिवाय’ का पहला प्रसारण 1997 में दूरदर्शन पर हुआ था। जाने माने सीरियल निर्माता निर्देशक धीरज कुमार का यह पहला धार्मिक सीरियल था। लेकिन इस सीरियल को इतना पसंद किया गया कि ‘रामायण’, ‘महाभारत’ के बाद ‘ओम नमः शिवाय’ ही था जिसे तब सर्वश्रेष्ठ धार्मिक सीरियल का ‘आधारशिला’ पुरस्कार मिला था। धीरज बताते हैं- ‘भगवान शिव मेरे भी आराध्य देव रहे हैं। इसलिए उन पर सीरियल बनाना मेरा पुराना सपना था। लेकिन इस सीरियल को बेहतर ढंग से बनाने के लिए पहले हमने सात साल तक गहन शोध किया। उसके बाद जब यह बनकर दूरदर्शन पर आया तो ‘ओम नमः शिवाय’ ने सफलता-लोकप्रियता का नया रिकॉर्ड बनाया। यह 416 एपिसोड तक चला। लेकिन तब इसके आधे घंटे का एक एपिसोड था और अब कलर्स पर इसके दो एपिसोड एक साथ दिखाये जाएँगे तो अब इसके 208 एपिसोड प्रसारित होंगे। हमारे लिए यह निश्चय ही खुशी की बात है कि पिछले दिनों हमारा एक सीरियल ‘श्री गणेश’ स्टार प्लस पर शुरू हुआ है तो अब कलर्स ‘ओम नमः शिवाय’ दिखाने जा रहा है।’ सीरियल में भगवान शिव की भूमिका दो कलाकारों ने की है। जिसमें पहले 52 एपिसोड में समर जयसिंह शिव बने, उसके बाद युवा शिव के रूप में यशोधन राणा ने यह मुख्य किरदार निभाया। इनके साथ गायत्री शास्त्री, मंजीत खुल्लर, संदीप मेहता, सुनील नागर, अमित पचौड़ी, अनीता कुलकर्णी, रीना कपूर, उपासना सिंह, शालिनी कपूर, राजेश्वरी सचदेव, निमाय बाली, गुफ़ी पैंटल और सर्वदमन बनर्जी अन्य प्रमुख भूमिकाओं में हैं। सीरियल का संगीत भी पंडित जसराज और शारंग देव ने दिया है। कोरोना काल को देखते हुए इस बार सीरियल की टैग लाइन है, ‘संकट के समय में, आइये शिव की शरण में’। कामना की मनोकामना लॉकडाउन के दिन जहां कुछ लोगों के लिए अभिशाप बन गए हैं वहां कुछ कलाकारों के लिए ये दिन किसी वरदान से कम नहीं। ऐसी ही एक कलाकार हैं कामना पाठक, जो एंड टीवी के सीरियल ‘हप्पू सिंह उलटन पलटन’ में मिसेज राजेश की भूमिका कर रही हैं। कामना पाठक इंदौर की रहने वाली हैं। लेकिन अपनी शूटिंग में वह मुंबई में इतनी व्यस्त रहीं कि पिछले चार बरसों से अपना जन्म दिन परिवार के साथ नहीं मना सकीं। लेकिन जब मुंबई में कोरोना के खतरों को देखते हुए शूटिंग बंद कर दी तो कामना तुरंत अपने घर इंदौर चली गईं। कामना कहती हैं- ‘मेरे लिए तब बेहद खुशी के पल थे जब मैंने चार साल बाद अपना जन्म दिन अपने परिवार के संग मनाया। साथ ही केक की जगह अपनी मम्मी द्वारा बनाई खीर खाई। मेरी मम्मी खीर इतनी अच्छी बनाती हैं कि मुंबई में उनके हाथ की बनाई खीर के लिए तरस जाती थी। लेकिन इस जन्म दिन पर उनके हाथ की खीर खाने की मेरी कामना पूरी हो गयी। हालांकि मेरे जन्म दिन पर मेरे दोस्त नहीं आ पाये। मेरी एक सहेली तो हर साल मेरे जन्म दिन पर चंडीगढ़ से आती थी। अफसोस इस बार वह नहीं आ पायी। पर परिवार के साथ में क्वालिटी टाइम बिता सकी यह मेरे लिए एक बड़ी खुशी है। हवा में लटके आशीष कुछ घटनाएं और दुर्घटनाएं ऐसी होती हैं जो भुलाए नहीं भूलतीं और ज़िंदगी भर के लिए सबब बन जाती हैं। ऐसी ही एक दुर्घटना जाने माने टीवी अभिनेता आशीष शर्मा की जिंदगी में भी घटी, जिसे याद कर वह आज भी सिहर उठते हैं। आशीष जहां स्टार प्लस के सीरियल ‘सिया के राम’ में राम के रूप में लोकप्रिय हुए। वहां ‘चन्द्रगुप्त मौर्य’ के चन्द्रगुप्त के रूप में भी उन्हें अच्छी लोकप्रियता मिली थी। इन दिनों ‘चन्द्रगुप्त मौर्य’ का प्रसारण दंगल टीवी पर हो रहा है। आशीष कहते हैं-‘उन दिनों ‘चन्द्रगुप्त मौर्य’ की शूटिंग के लिए मैं करीब 25-30 फीट की ऊंचाई से एक रस्सी के सहारे दूसरी इमारत की ओर झूल रहा था। दोनों इमारतों के बीच करीब 50 फीट की दूरी थी। लेकिन तभी हवा का एक जबर्दस्त झोंका तेज़ी से आया। किसी को भी इस बात की कल्पना नहीं थी। ऐसे में मैं फिसलता हुआ एक दीवार से जा टकराया। लेकिन सौभाग्य से अपने पैर की मदद से मैं खुद को सीधे टकराव से बचाने में सफल हो गया। वरना उस दिन क्या हश्र होता कह नहीं सकता। लेकिन बड़े टकराव से बचने के बाद भी मैं हवा में लटक रहा था। पूरी टीम मुझे सुरक्षित रूप से नीचे उतारने में जुट गयी। तब कुछ देर बाद मुझे जैसे नीचे उतारा तो मेरे साथ सभी की जान में जान आई।’ चुनौती था लंका दहन प्रसिद्द फ़िल्मकार रामानन्द सागर के सन 1987 में बने ‘रामायण’ सीरियल ने इस बार अपने दूरदर्शन के प्रसारण में, पिछली बार से भी ज्यादा दर्शक पाकर विश्व रिकॉर्ड बनाया है। इन दिनों इसी ‘रामायण’ सीरियल का प्रसारण स्टार प्लस पर चल रहा है। जिसमें पिछले दिनों ही लंका दहन का दृश्य दिखाया गया, तो उस दौर की पुरानी तकनीक में भी वह सब दिल को छू गया। तब यह सब इतने अच्छे ढंग से कैसे फिल्माया गया ? यह पूछने पर रामानन्द सागर के पुत्र प्रेम सागर बताते हैं-’ हमने इसके लिए विशेष रूप से आर्टिफ़िशियल टेल बनाने वाले विशेषज्ञ को लिया था। हम चाहते थे कि पूंछ ही आग पकड़े। इसके लिए हनुमान की भूमिका निभा रहे दारा सिंह जी ने बहुत मेहनत की। इस सीन के दौरान दारा जी को सात दिन तक रोज़ाना 6 घंटे तक भूखा भी रहना पड़ा था। तब हमारे भाई आनंद सागर उस दौर की उपलब्ध तमाम तकनीक से वह सीन शूट करते थे। उधर दारा सिंह जी के अभिनेता पुत्र विंदु दारा सिंह बताते हैं -दारा सिंह जी के लिए अपनी पूंछ से लंका दहन करने का सीन काफी चुनौती भरा था। लेकिन वह हमेशा अपने काम में शत प्रतिशत देने के लिए तत्पर रहते थे। हालांकि सिर्फ लंगोट पहनकर नंगे बदन शूटिंग करना बहुत ही जोखिम भरा था। ऊपर से अपनी पूंछ में आग लगवाने के बाद इधर से उधर भागना कई ख़तरों को निमंत्रण देने जैसा था। लेकिन सागर साहब ने दारा सिंह जी से यह सीन इतने अच्छे ढंग से फिल्माया कि वह सीन ‘रामायण’ के टॉप 10 सीन में आता है।’

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