रोमांटिक फिल्मों के राजा थे ऋषि

अलविदा ऋषि कपूर

पी. सरदाना अभिनय के 50 साल और डेढ़ सौ फिल्में। कपूर खानदान की गौरवशाली विरासत को आगे बढ़ाते हुए ऋषि कपूर ‘किंग ऑफ रोमांस’ का खिताब पा गये। 150 में से 90 फिल्मों का रोमांटिक होना इस छवि का प्रमाण है। चॉकलेटी चेहरे वाले ऋषि का जलवा ऐसा कि अपने से आधी उम्र की नायिकाओं के साथ भी खूब जमें। उनकी चरित्र अभिनेेता की पारी भी कम दमदार नहीं थी। अभिनय का जुनून ऐसा कि अलविदा कहने से पहले तक फिल्में कीं। ऋषि कपूर कैंसर की अग्रिम स्थिति पर पहुंच गए हैं, इस बात की आशंका तभी हो गयी थी जब वह सितंबर 2018 में अपना इलाज़ कराने के लिए अमेरिका पहुंचे थे। उधर ऋषि के वहां पहुंचते ही जब मुंबई में उनकी मां कृष्णा राजकपूर का निधन हो गया और वह अपनी मां की अंत्येष्टि के लिए वापस नहीं आए, तो तब भी साफ हो गया कि उनकी हालत नाजुक है। जब 11 महीने 11 दिन बाद, अमेरिका से इलाज कराके ऋषि प्रसन्नचित मुद्रा में, सितंबर 2019 में मुंबई लौटे तो तसल्ली हुई कि उन्होंने यह मुश्किल जंग जीत ली है। ऋषि ने मुंबई लौटकर जल्द ही अपनी फिल्मों की शूटिंग भी शुरू कर दी और वह ट्विटर पर भी जिस तरह लगातार सक्रिय रहे उससे भी ऐसे संदेश मिले कि मामला अब बिलकुल ठीक है। जिंदादिल ऋषि कपूर अपने काम और परिवार में फिर से सक्रिय तो हो गए लेकिन गत फरवरी में उन्हें एक बार दिल्ली के और एक बार मुंबई के अस्पताल में भर्ती होना पड़ा तो लग गया कि उनके सिर पर मौत का ख़तरा अभी भी मंडरा रहा है। और 30 अप्रैल को यह हकीकत में बदल गया। पृथ्वीराज कपूर के बाद उनके बेटे राज कपूर ने अपनी बेहतरीन फिल्मों और सांस्कृतिक परम्पराओं की जो गौरवशाली नींव रखी, उस पर नित जो नयी भव्य मंज़िलें बनती रहीं, उनमें ऋषि कपूर का बहुत बड़ा योगदान है। असल में राज कपूर के साथ उनके दो भाइयों शम्मी कपूर और शशि कपूर ने तो कपूर खानदान की विजय पताका को अच्छे से लहराया। लेकिन उनकी दूसरी पीढ़ी में एक ऋषि ही थे जो अपने खानदान का नाम रोशन किए हुए थे। शम्मी कपूर और शशि कपूर के बच्चों को तो फिल्मों में सफलता नहीं मिल पायी। उधर राज कपूर के तीन बेटों में से दो रणधीर कपूर और राजीव कपूर ने कुछ ही अच्छी और सफल फिल्में दीं । लेकिन ऋषि कपूर ही थे जो अपने पिता के साथ अपने दोनों चाचाओं और दादा का नाम और प्रतिष्ठा कायम रखे रहे। 50 बरसों का सफर ऋषि कपूर ने अपने करियर की शुरुआत 1970 में अपने पिता के आरके बैनर की चर्चित फिल्म ‘मेरा नाम जोकर’ में बाल कलाकार के रूप में की थी। उनकी अंतिम फिल्म ‘द बॉडी’ दिसंबर 2019 में ही प्रदर्शित हुई है। जबकि लॉकडाउन से पहले मार्च में भी ऋषि कपूर, जूही चावला के साथ एक फिल्म ‘शर्माजी नमकीन’ की शूटिंग कर रहे थे। इससे ऋषि कपूर को फिल्मों में काम करते हुए 50 बरस हो गए थे। अपनी 67 बरस की ज़िंदगी में 50 वर्ष का लंबा करियर बहुत मायने रखता है। इस दौरान ऋषि कपूर ने करीब 150 फिल्मों में काम किया। दिलचस्प बात यह है कि इन फिल्मों में लगभग 90 फिल्में ऐसी थीं जिनमें उनका रोमांटिक रोल था। रोमांटिक हीरो की छवि देखा जाये तो ऋषि कपूर पिछले 50 बरसों में हिन्दी सिनेमा के सबसे बड़े रोमांटिक हीरो हैं। चाहे पिछले करीब 25 बरसों में शाहरुख खान ने भी रोमांटिक हीरो के रूप में अपनी एक अच्छी छवि बनाई लेकिन शाहरुख या ऐसे कुछ अन्य नायकों का नंबर ऋषि के बाद ही आएगा। रोमांस के बादशाह और किंग ऑफ रोमांस तो ऋषि कपूर ही हैं। ऋषि कपूर असल में हिन्दी सिनेमा के ऐसे नायक थे जिनके साथ लॉंच होने के लिए नयी अभिनेत्रियां बेताब रहती थीं। यही कारण है कि करीब 20 अभिनेत्रियों ने हिन्दी सिनेमा में बतौर नायिका अपना करियर या अपनी प्रमुख फिल्म ऋषि के साथ शुरू की। जिनमें डिम्पल कपाड़िया, नीतू सिंह, शोमा आनंद और जया प्रदा से लेकर दिव्या भारती तक कई नाम हैं। ऋषि कपूर ने अपने 50 बरस के करियर में करीब 50 नायिकाओं के साथ काम किया। आधी उम्र की नायिकाओं के भी हीरो बने ऋषि की बतौर हीरो पहली फिल्म 1973 में प्रदर्शित ‘बॉबी’ थी। तब ऋषि की उम्र 21 साल थी। ‘बॉबी’ की हीरोइन डिम्पल ने अपनी यह पहली फिल्म रिलीज होने से पहले ही राजेश खन्ना से शादी कर ली थी। फिल्म रिलीज़ होने के बाद तो डिम्पल ने तब फिल्मों को अलविदा कह दिया था। जबकि ‘बॉबी’ सुपर हिट होने से ऋषि एक चॉकलेटी हीरो के रूप में बड़े स्टार बन गए थे। ऋषि ने अपनी हमउम्र एक्ट्रेस के अलावा अपने से आधी उम्र की हीरोइनों के साथ भी काम किया। जैसे जब 1992 में ‘दीवाना’ फिल्म आई तब ऋषि 40 साल के थे तो दिव्या भारती 18 साल की थीं। ऐसे ही रवीना टंडन, उर्मिला मतोंदकर, पूजा भट्ट और तब्बू जैसी उनकी हीरोइन के बीच भी उम्र का लंबा फासला था। ऋषि की कुछ हीरोइंस ऐसी भी रहीं जो उम्र में उनसे ज्यादा बड़ी थीं। जैसे राखी, हेमा मालिनी और शबाना आज़मी। उनकी जोड़ी डिम्पल, नीतू सिंह, पद्मिनी कोल्हापुरे, रंजीता, श्रीदेवी, जूही चावला, माधुरी दीक्षित और फरहा के साथ भी खूब जमीं। यादगार अभिनय रोमांटिक हीरो के रूप में ऋषि करीब करीब सन 2000 तक काम करते रहे। जिनमें ऋषि ने रफूचक्कर, खेल खेल में, बारूद, लैला मंजनू, कभी कभी, सरगम, कर्ज़, अमर अकबर एंथनी, प्रेम रोग, सागर, नागिन, बोल राधा बोल, और चांदनी जैसी एक से एक यादगार फिल्म दी। बाद में जब ऋषि चरित्र अभिनेता के रूप में आए तो उनके अभिनय के ऐसे गहरे रंग देखने को मिले जिन्हें कभी मिटाया नहीं जा सकता। अग्निपथ, चिंटू जी, कपूर एंड संस, मुल्क और 102 नॉट आउट जैसी उनकी फिल्में इस बात की साक्षी हैं। मुझे इस बात का गर्व है कि इस महान अभिनेता और अच्छे इंसान ऋषि कपूर के साथ इनके परिवार के लगभग सभी सदस्यों से मिलने और उनसे बात करने के मुझे कई मौके मिले। वह अपनी बात साफ़गोई और बिना किसी लाग लपेट के कहने में तनिक संकोच नहीं करते थे। नीतू सिंह चट्टान बनकर रहीं साथ ऋषि की पत्नी नीतू सिंह कपूर उनकी नायिका भी रहीं और दोस्त भी। नीतू सिंह के साथ ही ऋषि ने सबसे ज्यादा 15 फिल्में कीं। ऋषि अपनी बातचीत में बताते थे कि उनके बच्चों और घर को जिस तरह नीतू ने संभाला, उसी के चलते वह सुकून के साथ इतना काम कर पाये। ऋषि की बीमारी के मुश्किल दिनों में भी नीतू सिंह मुंबई से न्यूयॉर्क तक उनके साथ चट्टान बनकर खड़ी रहीं। ऋषि कपूर जैसे सशक्त अभिनेता का जाना सिनेमा के लिए निश्चय ही बड़ी क्षति है। ऋषि के बेटे रणबीर कपूर अपने शानदार अभिनय से अपने दादा-पिता की विरासत को संभाले हुए हैं।

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