रिश्तों में भरें नए रंग

मोनिका शर्मा

रिश्ते करीबी हों या दूर के, अब मेलजोल कम ही होता है। यहां तक कि एक ही छत के नीचे रहने वाले लोगों में भी दूरियां आ रही हैं। ऐसे में आने वाले साल में अपनों के साथ मेलजोल बढ़ाने की सकारात्मक शुरुआत कीजिये। मेलजोल बढ़ाएं नये साल में नयी शुरुआत करें। मेलजोल बढ़ाने का काम इसलिये करें क्योंकि समय रहते समझिये कि रिश्तों में जुड़ाव के लिए समय निकालना ज़रूरी है। वरना एक समय ऐसा भी आता है, जब इनसान के पास समय तो होता है पर रिश्ते कहीं पीछे छूट जाते हैं। इस साल जिंदगी की भागमभाग से कुछ लम्हे रिश्तों को सींचने-सहेजने के लिए निकालिये। मिल-जुलकर बैठने-बतियाने के लिए फुर्सत निकालने का रेजोल्यूशन कीजिये। बीती बातें भुलाएं बीती बातों को भुलाना रिश्तों में नया रंग भरने की एक खूबसूरत शुरुआत हो सकती है। कई बार रिश्तों में अनबन हो जाती है। ना चाहते हुए भी दूरियां आ जाती हैं। छोटी-छोटी बातों पर नाराजगी की बड़ी-बड़ी दीवारें खड़ी हो जाती हैं। लेकिन जिंदगी इतनी बड़ी नहीं होती कि ऐसे तकलीफदेह वाकयों को हमेशा के लिए रिश्तों में दर्द और दुःख की वजह बना दिया जाये। कहते भी हैं कि सच्चे रिश्तों की खूबसूरती एक-दूसरे गलतियां बर्दाश्त करने में है, क्योंकि बिना कमी का कोई इनसान तलाशेंगे तो अकेले रह जायेंगे। बीते कल की बातों को भूलना इसीलिए भी अहम है कि समय के साथ संबंधों में आये बदलावों को समझने और साथ चलने के लिए यही पहला कदम है। इसीलिए नए साल में ऐसी गलतफहमियों और गलतियों को भुलाकर नए सिरे से अपनेपन को साधें। मिलकर खुशियां मनाएं खुशियां साझा करते हुए आप अपने रिश्तों में दोबारा नयापन ला सकते हैं। इतना ही नहीं, ऐसा खुशनुमा साथ बिखरे रिश्तों को भी जोड़ सकता है। नए साल में तय कीजिये आप अपनों के साथ मिलकर खुशियां मनायेंगे। कोई खास मौका हो या त्योहार, अपनों के साथ सेलिब्रेट करने से मेल भी बढ़ता है और खुशियां भी। आपाधापी की इस जिन्दगी में मिलीजुली खुशियां ही साथ को मायने देती हैं। रिश्तों के इमोशनल बॉन्ड को मजबूत करती हैं। सुखद यह भी कि ऐसे सोशल इवेंट्स के जरिये नई पीढ़ी भी आपसी मेलजोल और साथ के मायने समझती है। बच्चे रिश्तों-नातों को जान पाते हैं। इसीलिए यह नई शुरुआत भावी जिन्दगी में भी रिश्तों को साधने की बुनियाद बन सकती है। तकनीक को साथी बनाएं तकनीकी व्यस्तता ने रिश्तों में दूरियां ला दी हैं। लेकिन तकनीक से मिली सुविधाओं का सही इस्तेमाल कर रिश्तों को और करीब भी लाया जा सकता है। तकनीक के तार दिलों को जोड़ने वाले भी साबित होते हैं। आज पल भर में दूर बैठे अपनों की भी कुशलता जानी जा सकती है। सोशल मीडिया के जरिये किसी एक ग्रुप में जुड़े रिश्तेदारों की एक्टिविटीज एक-दूसरे तक पहुंचती है। बिना देरी के अपनों के साथ सुख-दुःख साझा किया जा है। कोई जरूरी मदद पहुंचाई जा सकती है। सुखद है कि इस टेक्नीकल दौर में यों अपनों से जुड़े रहना मन में भी फासले नहीं आने देता। नए साल में तय कीजिये कि सकारात्मक ढंग से तकनीक का इस्तेमाल कर अपनों से और जुड़ने की कोशिश करेंगे।

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