राव का दांव

रामपुरा हाउस वाले ‘राव साहब’ ने इस बार बड़ा सियासी दांव खेला है। उन्होंने भिवानी-महेंद्रगढ़ के सांसद धर्मवीर और सोनीपत के सांसद रमेश कौशिक को साथ लेकर एसवाईएल मुद्दे पर अपनी ही पार्टी के सीएम को घेरने की रणनीति बना डाली है। इस मुद्दे पर वे सभी 10 सांसदों को साथ लेकर पीएम मोदी से मुलाकात की तैयारी में हैं। अपने खट्टर काका के करीबी ‘छोटे राव साहब’ को लेकर काफी आहत चल रहे बड़े राव साहब अहीरवाल से बाहर भी अपनी ताकत दिखाने में जुटे हैं। ऐसे में अब एसवाईएल पर मोदी से मुलाकात के जरिये वे खुद की ताकत ही दिखाने की फिराक में हैं। वैसे भाजपा के गलियारों में सांसदों की यह तिकड़ी भी कम चर्चाओं में नहीं है। पता लगा है कि तिकड़ी आने वाले समय में कुछ ‘बड़ा’ करने की भी प्लानिंग में है। अब राजनीति में सबकुछ चाह अनुसार हो जाए, ऐसा भी संभव नहीं है। फिर भी राव साहब ने दांव तो खेल दिया है। अब देखना यह होगा कि उनके पासे किस ओर पड़ते हैं। काका का जवाब ‘खट्टर काका’ भी किसी पर उधारी नहीं रखते। राव इंद्रजीत द्वारा लगातार किए जा रहे सियासी हमलों का जवाब काका ने मौका लगते ही दे दिया। गुरुग्राम मेट्रोपोलिटन विकास प्राधिकरण के लिए नियुक्त किए गए सदस्यों में स्थानीय सांसद होने के बावजूद राव इंद्रजीत को जगह नहीं दी गई है। काका ने अपने करीबी राव नरबीर सिंह को इसका सदस्य बनाया है। निगम मेयर होने के नाते मधू आजाद को जरूर जीएमडीए में जगह मिली है। गत दिनों जारी हुई यह सूची न केवल चर्चाओं में है, बल्कि भाजपा का सियासी पारा भी गरमाया हुआ है। काका ने राव के नहले पर दहला मारा है। चुनाव तो लड़ूंगा जींद के एक पुराने भाजपाई पंडितजी इस बार काफी पहले से ही सक्रिय हो चले हैं। पगड़ वाले ये पंडितजी जुलाना से चुनाव लड़ना चाहते हैं। पिछली बार भी कोशिश की थी, लेकिन बात नहीं बनी। राहें इस बार भी मुश्किल हैं, लेकिन चुनाव लड़ने की ठान चुके हैं। भाजपा में करीबी मंत्रियों और नेताओं के साथ भी मन की बात साझा कर चुके हैं। कहते हैं टिकट मिली तो सही, नहीं तो चुनाव पक्का लड़ूंगा। भाजपा के प्रति समर्पित हूं, इसलिए भाजपा के आजाद उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ा जाएगा। सचिवालय में एक मंत्री के पास बैठे-बैठे उन्होंने इस बात का खुलासा कर दिया। यही नहीं, पंडितजी ने यहां तक कह दिया कि चुनाव में झंडे और बैनर का रंग भी भगवा होगा। अंतर होगा तो केवल चुनाव-चिह्न का। सुखद पहल आमतौर पर शहीदों व महापुरुषों की जयंती-पुण्यतिथि के कार्यक्रमों में भी राजनीति देखने को मिलती है। लेकिन इस बार इंद्री में मनाई गई शहीद उधम सिंह की जयंती राजनीति से कोसों दूर नज़र आई। राज्य मंत्री कर्णदेव काम्बोज द्वारा आयोजित कार्यक्रम में राज्यपाल प्रो. कप्तान सिंह सोलंकी मुख्य अतिथि थे। मंच और पूरे पंडाल में किसी भी नेता का एक फोटो तक नज़र नहीं आया। फोटो थे तो केवल शहीदों के। यही नहीं, मंच का संचालन भी इनेलो के वरिष्ठ नेता जेपी काम्बोज के हाथों में रहा। लाट साहब ने भी राजनीति में आए इस बदलाव की दिल से तारीफ की। वायरल आडियो लगता है हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग के चेयरमैन भारत भूषण भारती और विवादों का चोली-दामन का साथ है। ब्राह्मणों के प्रति की गई आपत्तिजनक टिप्पणी में जस्टिस दर्शन सिंह की रिपोर्ट में क्लीन-चिट के बाद उन्होंने फिर से आयोग का कामकाज संभाला ही था कि एक और आडियो वायरल हो गया। इस तथाकथित आडियो में उनके बेटे की आवाज होने का दावा किया जा रहा है। इसमें एक मेडिकल ऑफिसर को ठेके की नौकरियों के बारे में दिशा-निर्देश देते आवाज सुनाई पड़ रही है। हालांकि, सरकार में बैठे लोग ठेकेदारों के जरिये लगने वाली नौकरियों में अपने लोगों को एडजस्ट कराते रहे हैं। मौजूदा सरकार में भी इसमें नये जैसा कुछ नहीं है, लेकिन आडियो वायरल होने के बाद सिरदर्द बढ़ना स्वाभाविक है। रोचक बात यह है कि सरकार में ही अहम ओहदों पर बैठे कई भाजपाई जरूर इस आडियो पर चटकारे ले रहे हैं। चेयरमैनों का रिपोर्ट कार्ड हरियाणा में बोर्ड-निगमों के चेयरमैन भी अब फील्ड में दौड़ते नजर आएंगे। 60 से अधिक बोर्ड-निगमों के चेयरमैनों एवं राजनीतिक पदों पर आसीन भाजपाइयों को अब बूथ स्तर पर अपने जौहर दिखाने होंगे। वे काम भी करेंगे और अपने बूथ की रिपोर्ट भी मंडलाध्यक्ष को देंगे। चुनाव आ रहे हैं, ऐसे में पार्टी अब इनका भी रिपोर्ट कार्ड तैयार करेगी। पार्टी प्रदेशाध्यक्ष सुभाष बराला ने चेयरमैनों के साथ बैठक करके उन्हें काम के बारे में बता दिया है। आखिर में चलो जीते हैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जीवन पर आधारित लघु फिल्म ‘चलो जीते हैं’ अपने खट्टर काका को काफी पसंद आई। फिल्म के बारे में सुनने के बाद वे रुक नहीं पाए और तुरंत डीटी मॉल में पूरा शो बुक करवा दिया गया। आधा दर्जन से अधिक कैबिनेट सहयोगियों, एक दर्जन से अधिक विधायकों व आला अफसरों के साथ काका ने फिल्म देखी। वैसे भी अपने ‘गुरु’ की फिल्म को कौन छोड़ना चाहेगा और काका और नमो के तो रिश्ते ही बहुत गहरे और पुराने हैं। चलो अच्छा ही है दिनभर की राजनीतिक और प्रशासनिक व्यस्तताओं के बीच काका ने कुछ समय तो मनोरंजन के लिए भी निकाला। वैसे काका को देशभक्ति की फिल्में बहुत पसंद हैं।

-दिनेश भारद्वाज

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