मोबाइल मैकेनिक बनकर आत्मनिर्भर बनें

करिअर

अनिल कुमार

अगर मोबाइल सेट्स को रिपेयर करने का हुनर आप में हो तो इसे रोजगार का अच्छा जरिया बनाया जा सकता है। शिक्षित बेरोजगार युवकों  के लिए आज के परिवेश में मोबाइल,सेटेलाइट फोन,लैंडलाइन फोन, मोबाइल चार्जर आदि इलेक्ट्रानिक सामानों का मैकेनिक बनकर स्वरोजगार स्थापित करने का अच्छा अवसर है। खास बात यह है कि इस उद्यम को शुरू करने में बहुत पैसे की जरूरत भी नहीं पड़ती है जबकि यह फायदा बहुत देता है। इसे सीखने में भी बहुत समय नहीं लगता, लेकिन यह जरूरी है व्यक्ति का रूझान उस तरफ हो। कोई भी युवक छह से आठ माह के पाठ्यक्रम एवं  5 से 10 हजार रुपये खर्च कर एक  कुशल मोबाइल मैकेनिक बनकर अपना रोजगार प्रारंभ कर सकता है। तकनीकी प्रशिक्षण :  मोबाइल प्रशिक्षण संस्थानों में चिप लेवल सर्विस और मोबाइल रिपेयरिंग का प्रशिक्षण दिया जाता है  जिसमें कई प्रकार के तकनीकी बिन्दुओं की जानकारी देने के साथ-साथ व्यावहारिक तौर पर मोबाइल के संचालन से लेकर मरम्मत करने व बनाने का कार्य सिखाया जाता है, यथा सोल्डरिंग, डिसोल्डरिंग ऑफ कम्पोनेंट्स, बैटरी में वोल्टेज चेक करना, एसएमडी  री-वर्क स्टेशन  का प्रयोग, ट्रिगरिंग ऑफ बैटरी, असेंबलिंग और  डिसअसेंबलिंग ऑफ  मोबाइल फोन, चिप लेवल सर्विसिंग ऑफ कंपोनेंट्स आदि। हार्डवेयर प्रॉब्लम : कई बार मोबाइल में हार्डवेयर प्रॉब्लम हो जाते हैं  जिसके चलते बैटरी,चार्जिंग प्रॉब्लम, वाटर डैमेज, नेटवर्क डिस्पले,रिंगर, आडियो, वीडियो, इनकमिंग व आउटगोइंग, इन्सर्ट सिम कार्ड, टोटल डेड, कैमरा प्रॉब्लम आदि शामिल हैं। सॉफ्टवेयर प्रॉब्लम : कांटेक्ट सर्विस, हैंगिंग, पार्शियल डैड, नेटवर्क, अनलॉकिंग, फ्लैशिंग, वेरयिस सॉफ्टवेयर यथा सूएसआर, ट्विस्टर, टोरनाडो, ग्रिफिन, यूनी वॉक्स फॉर कलर, ब्लूटूथ आदि संबंधी समस्याएं सॉफ्टवेयर प्रॉब्लम के अंतर्गत आती हैं। आप अपनी इच्छानुसार सॉफ्टवेयर या हार्डवेयर में स्पेशलाइजेशन कर सकते हैं। एक कुशल मैकेनिक बनने के लिए यूं तो पुस्तकों की कोई कमी नहीं है,लेकिन बिना प्रशिक्षण केन्द्र में गये कोई भी जानकारी  आपकी कागजी ही बनी रह जायेगी। आजकल शहर के छोटे-बड़े सभी इलाकों में मोबाइल मैकेनिक बनने हेतु प्रशिक्षण केन्द्र चलाए जा रहे हैं जहां युवकों को प्रशिक्षण देने की अच्छी व्यवस्था होती है। कई सरकारी और प्राइवेट संस्थानों  में मोबाइल फोन की मरम्मत एवं  अनुरक्षण पाठ्यक्रम पढ़ाये जाते हैं। इन प्रशिक्षण केन्द्रों में अपना नामांकन कराकर प्रशिक्षण लेना युवकों के लिए काफी लाभकारी सिद्ध होता है। मैकेनिक बनने के लिए बाजार में उपलब्ध पुस्तकों के अलावा किसी भी जगह चल रहे प्रशिक्षण केन्द्र में नामांकन कराने से अध्ययन एवं प्रायोगिक जानकारी अच्छी तरह मिल जाती है। मोबाइल मैकेनिक बनने के लिए मेहनत और लगन से शिक्षा ग्रहण करने के साथ छह से आठ माह का प्रशिक्षण पाठ्यक्रम काफी होता है जिसमें बेसिक चीजें सिखा दी जाती हैं। इनकी फीस भी बहुत अधिक नहीं होती है। कोर्स पूरा करने के बाद व्यक्ति को किसी  के साथ रहकर प्रैक्टिकल अनुभव प्राप्त करना चाहिए। विशेषज्ञों  का कहना है कि अगर व्यक्ति ठीक से काम करता है तो इसमें निपुणता हासिल करने के लिए एक साल का वक्त काफी है। बाकी कोर्स के दौरान मरम्मत से संबंधित  गहरी बेसिक जानकारी दी ही जाती है। प्रशिक्षण प्राप्त करने में सफलता मिलने  पर आप अपने को तब तक कुशल मोबाइल मैकेनिक नहीं समझें, जब तक स्वयं बिना किसी के सहयोग से ही मोबाइल सेटेलाइट फोन, मोबाइल चार्जर आदि इलेक्ट्रॉनिक सामानों की मरम्मत नहीं कर लेते हो। इन इलेक्ट्रॉनिक  उपकरणों में कैसे और किस प्रकार की खराबी आती है, इसकी पूरी जानकारी प्रायोगिक  ज्ञान के दौरान ही प्राप्त कर लेना आवश्यक होता है। दुकान खोलें या मोबाइल रिपेयरिंग सेंटरों  में नौकरी पर जायें :  पूरी तरह प्रशिक्षण प्राप्त कर लेने के बाद आप अपने क्षेत्र के किसी भी जगह पर मोबाइल,सेटेलाइट फोन, मोबाइल चार्जर आदि इलेक्ट्रानिक सामानों की मरम्मत की दुकान प्रारंभ कर सकते हैं। दुकान खोलने में भी बड़ी लागत नहीं आती। बस मोटा खर्चा जगह का होता है जो वह अपने बजट के अनुसार खरीदे या किराये पर ले लें। प्रारंभ में इसके लिए कुछ जरूरी सामानों जैसे टूल्स और स्पेयर जो 5 से 10 हजार में  आसानी से आ जाते हैं, का क्रय करना आवश्यक है ताकि मरम्मत का काम सुचारु रूप से चल सके।  आवश्यक सामानों में छोटे-बड़े पेचकस, प्लास,सोल्डर, कटर, डिजिटल मल्टीमीटर,सोल्डरिंग आयरन,चिमटा आदि होंगे जो लगभग 1 हजार रुपये से 2 हजार रुपये में क्रय किये जा सकते हैं। इसके अलावा इलेक्ट्रॉनिक पाट्र्स,टेबल-कुर्सी   आदि की भी जरूरत होगी। यूं तो पाट्र्स में पूंजी लगाने से तीन गुना लाभ मिल जाता है। जो स्पेयर या पाट्र्स मोबाइल में लगते हैं वे सामान्यता अपने शहर की लोकल और थोक मार्केट से ही खरीदे जा सकते हैं जिनमें अच्छी कमायी है। व्यक्ति ज्यादा सामान खरीदकर वैसे भी नहीं रखता क्योंकि हर मोबाइल की जरूरत अलग-अलग होती है और जरूरत पडऩे पर ही सामान लिया जाता है। कोर्स करने के बाद आप पूंजी लगाकर अपना खुद का व्यवसाय शुरू कर सकते हैं या फिर मोबाइल रिपेयरिंग सेंटरों में नौकरी कर सकते हैं। मोबाइल मैकेनिक के तौर पर आपको अच्छा वेतन आसानी से प्राप्त हो सकता है। आप प्रतिदिन आसानी से 500 से 1000 रुपये कमा सकते हैं। मोबाइल सेंटरों की संख्या दिन-प्रतिदिन बढ़ती ही जा रही है। पब्लिसिटी जरूरी है : इस काम की मुख्य जरूरत है पब्लिसिटी यानी प्रचार। आपका काम अच्छा होगा, तो कस्टमर में विश्वास बढ़ेगा और वे आपके पास आयेंगे ही। साथ ही अपने विजिटिंग काड्र्स छपवा लें और जो भी कस्टमर आये मोबाइल  रिपेयरिंग कराने के लिए उन्हें अपना कार्ड दे दें। अपने दोस्तों, मोहल्ले, रिश्तेदार, पड़ोस हर जगह अपने कार्ड बंटवाएं। हालांकि एक बार जब आप अच्छा काम देते हैं तो लोग खुद ही दस जगह आपकी चर्चा करते हैं। फिर भी इस बिजनेस में लिंक बनाना बहुत जरूरी होता है। काम धीरे-धीरे ही मिलता है, पर एक बार लय बन जाने के बाद और स्थापित हो जाने के बाद काम की कमी नहीं होती। हालांकि इसमें आपके प्रदर्शन का भी महत्वपूर्ण रोल होता है। समय पर सर्विसेस  देना,सही चार्ज लेना जैसी चीजें बहुत अहम होती हैं। मोबाइल मैकेनिक की सफलता उसकी व्यवहार कुशलता, सम्पर्क क्षमता और निश्चित समय पर संतोषजनक काम निपटा देने जैसे व्यावसायिक गुणों पर ही अधिक निर्भर करती है। स्थापित हो जाने के बाद मोबाइल रिपेयरिंग में अच्छी कमायी है। शुरू-शुरू में थोड़ा संघर्ष करना पड़  सकता है। आजकल मोबाइल रिपेयरिंग बढ़ती मांग और इसके मरम्मत का काम लेकर मोबाइल मैकेनिक का व्यवसाय काफी लाभकारी हो गया है।  शहर  हो या गांव, मोबाइल मैकेनिक  की जरूरत लोगों के लिए  आवश्यक हो गई है। मरम्मत के लिए बदले जाने वाले पाट्र्स भी अब  अधिकांश दुकानों में उपलब्ध होने से इन्हें रखने के लिए मैकेनिक को अतिरिक्त पूंजी की भी जरूरत नहीं होती है।

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