मैप रक्षा के लिए एप खल्लास

तिरछी नज़र

शमीम शर्मा

इधर पेट्रोल व डीजल के दामों में अक्कड़-बक्कड़ बम्बे बो, अस्सी नब्बे पूरे सौ का खेल हो रहा था कि अचानक 59 का अंक पूरे देश पर छा गया। जैसे कि रेगिस्तान में जबरदस्त धूल भरी आंधी आ गई हो और चारों तरफ रेत ही रेत। सहसा एक समाचार आग की तरह फैल गया कि चीन पर डिजिटल स्ट्राइक कर दी गई है। अकस्मात ही देश में खुशहाली छा गई कि चीन की 59 एप का क्लेश काट दिया है और अपने 20 सिपाहियों के बलिदान का बदला 59 एप बैन करके ले लिया गया है। पर कहावत है कि बाल उखाड़ने से मुर्दा हल्का नहीं होता। कहने वाले तो यह भी कह रहे हैं कि चीन पर अभी तो मोदी जी की तलवार लटक रही है, पता नहीं और किस-किस की शामत आई है। इस बार तो उनका चीनियों को सबक सिखाने का इरादा है। यह तय है कि मोदी जी देश के मैप के लिए कुछ भी कर सकते हैं, एप तो किस खेत की मूली है? यूं तो जीवन में सब कुछ ही आना-जाना है पर टिकटॉक के जाने पर युवा पीढ़ी खुद को अनाथ-सा समझ रही है। नये उभरते कलाकारों-सितारों का अब क्या होगा? सबको लाइन में बिठाकर चाय-सी पिला दी। कई बेवक्त ही रुल गये बेचारे। टिकटॉक के बैन ने तो असंख्य गवैये, नचैये और एक्टिंगबाजों को श्रद्धांजलि-सी दे दी। एक सयाने का सुझाव है कि टिकटोकियों को जीरी लगवाने के लिए बुला लो और दिहाड़ी में पैसे देने की बजाय शाम को डीजे लगवाकर दो घण्टा नचवा दो, कूदते फिरेंगे। अपने एक हरियाणवी ताऊ का अनुमान है कि टिकटॉक पै नाचणिये ईब बैंड बाज्जे वालां गैल डी सी रेट पै नाच्या करैंगे। मुझे लगता है कि टिकटॉक के लाखों फोलोवर अब अपने काम-धन्धे पर ध्यान देंगे। मनोरंजन का जिम्मा अब उन लोगों पर है, जिन्होंने टिकटॉक बंद होते ही मुंह खोल लिया है। पर अभी तो चीनियों की हालत पतली है और अपने टिकटॉक स्टार कब्ज से ग्रस्त हैं। कब्जे की बात तो बाद में। 0000 एक बर की बात है अक नत्थू का बाब्बू सुरजा बोल्या—देख बेट्टा, मैं तेरे खात्तर नये जूते ल्याया हूं। नत्थू जूते देखते ही राज्जी हो गया पर फेर भूंडा सा मुंह बणाते होये बोल्या—पर बाब्बू, इनका साइज तो बड़ा है। सुरजा बोल्या—रै बावलीबूच! पहरूंगा तो मैं, तन्नैं तो सिर्फ खाणे हैं बस।

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