मेरी पहचान बन गया है सीआईडी शिवाजी साटम

रामकिशोर मराठी, हिंदी टीवी और फिल्मों में काम करने वाले वरिष्ठ अभिनेता शिवाजी साटम भारतीय टीवी पर सबसे लंबे चलने वाले सोनी के धारावाहिक सीआईडी में एसीपी प्रद्युम्न नाम के एक ऐसे पुलिस जांच अधिकारी की भूमिका हैं जिसने उन्हें भी लगभग अपना असली चेहरा और नाम भुला-सा दिया है। वे कई फिल्मों में ऐसी भूमिकाएं कर चुके हैं पर जो ऊंचाई सीआईडी के प्रद्युम्न ने उन्हें दी है वह उनके करिअर की सबसे बड़ी ऊंचाई है। अपनी इस सफलता के अवसर पर पिछले पखवाड़े जब वे मुंबई में मिले तो रोमांच और उत्साह से भरे हुए थे। एसीपी प्रद्युम्न अब आपकी पहचान बन गया है? हां, ये सोचकर अच्छा लगता है। अब यह मेरी पहचान बन गया है। पर यह केवल एक धारावाहिक भर नहीं है। बच्चे और बड़े अब मुझसे सीन कॉनेरी की तरह व्यवहार करते हैं। उन्हें लगता है कि सचमुच किसी जासूसी करने वाले समूह का हिस्सा हूं। शायद इसीलिए पिछले दो सालों से यह लगातार अवार्ड जीत रहा है। इसे राष्ट्रपति तक की सराहना मिली है। दरअसल यह आम और ईमानदार लोगों को न्याय दिलाने वाला धारावाहिक है। पहले यह केवल भारत में फिल्माया जाता था लेकिन अब इसे पेरिस और स्विट्$जरलैंड में भी शूट किया गया है। आपका परिवार आपके इस धारावाहिक के बारे में क्या सोचता है? खुशी होती है जब वे मेरे इस सबसे लंबे चलने वाले धारावाहिक के बारे में लोगों से सुनते हैं। मैं तेरह साल से इसमें व्यस्त हूं लेकिन जब मुझे फुरसत मिलती है तो मैं अपने परिवार के पास होता हूं। ऐसे लंबे चलने वाले धारावाहिक या शो आमतौर पर लोगों की व्यक्तिगत जिंदगी को भी बदल देते हैं पर मेरे साथ कुछ नहीं बदला है। बस मैं इसमें नया और सर्वश्रेष्ठ करने की कोशिश करता हूं। अपने साथी कलाकारों के बारे में क्या सोचते हैं? सब शानदार कलाकार हैं। पर ताशा की मौत ने सबको हिला दिया। लेेकिन इस एक चरित्र की मौत ने कुछ और लोगों को इसमें शामिल होने का मौका दिया। दया शेटी अब झलक दिखला जा में शामिल हुए हैं तो आदित्य श्रीवास्तव लंबे समय से इसमें शामिल हैं। आप नहीं बदले इसकी वजह क्या है? यह तो आपको इसके निर्देशक बीपी सिंह से पूछना पड़ेगा। दरअसल मैं और बीपी सिंह सत्तर के दशक से दोस्त हैं। उस समय हम दोनों ही करिअर शुरू कर रहे थे। जब सीआईडी की शुरुआत हुई तो बीपी ने मुझे इस भूमिका के लिए प्रस्ताव दिया। मैं उस समय यह नहीं करना चाहता था। लेकिन बीपी ने कहा कि तुम करके देखो। पसंद न आए तो छोड़ देना। मैंने कहा कि मैं इसे अपनी शैली में करूंगा और आज तक वह ऐसे ही चल रहा है। और आप मराठी फिल्मों और धारावाहिकों के बावजूद इसमें जम गए? शायद। इसकी वजह है कि मेरी पहली मराठी फिल्म एक था वादी के बाद उतरायण जैसी फिल्मों ने मुझे जो पहचान दी है उसके चलते एक मराठी कलाकार के लिए हिंदी फिल्म जगत में जम पाना काफी चुनौती भरा था। टीवी पर तो बिल्कुल नहीं। पर मेहनत और किस्मत ने मेरा साथ दिया। लेकिन एक धारावाहिक के इतने लंबे समय तक चलने के कारण इसकी टीआरपी प्रभावित नहीं हुई? नहीं। यदि ऐसा होता तो हमारे काम पर इसका असर जरूर पड़ता। हम इसे तेरह साल से कर रहे हैं पर हर बार और हर रूप में यह नया लगता है। इसका कारण है कि यह अलग किस्म और तेवर का धारावाहिक हैं। यह सास बहु वाला शो नहीं है जहां सब कुछ एक जैसा ही होता रहता है। यहां एक तरह का रहस्य हमेशा बना रहता है। लोग इसे पसंद करते हैं। सबसे बड़ी बात है कि पुरुष प्रधान होने के बावजूद यह महिलाओं में ज्यादा लोकप्रिय है। आपने सीआईडी के अलावा टीवी पर और कुछ क्यों नहीं किया? मैं मराठी और हिंदी फिल्मों में भी व्यस्त रहता हूं। इसके बाद तीस दिन इसके शूट में। समय ही नहीं मिलता। फिर मुझे लगता है किसी चरित्र को इससे ज्यादा ऊंचाई पर नहीं ले जाया सकता। आपका अब तक का कौन सा एपिसोड सबसे अधिक पसंद वाला है? मुझे सारे एपिसोड पसंद है। लेकिन मैं मानता हूं कि जब एसीपी अंधा हो जाता है तो उस काल में सुलझाए गए केसों वाले एपिसोड सबसे अधिक रोमंाचित करने वाले थे। इसके अलावा दहेज समस्या वाले केस के एपिसोड करने में भी मुझे मजा आया। मराठी फिल्मों के लिए जब आपको पुरस्कार मिले तो कितना मजा आया? यह पुरस्कार मुझे मेरी मराठी फिल्म एक होता वादी के लिए मिला था। मुझे लगता है ऐसे पुरस्कार आपके प्रोफेशन और व्यक्तिगत विकास और रचनात्मकता के प्रतीक होते हैं। आपकी हिंदी फिल्में कितनी हैं और कौन-सी आपको ज्यादा पसंद हैं? ऐसे तो बताना बहुत मुश्किल है। लेकिन फिर भी हुतूतू, वास्तव, दाग, लगान, प्राण जाए पर शान ना जाए, गुलामे मुस्तफा, निदान, नायक,  किसना और अपनी अंगे्रजी फिल्म स्पिल्ट वाइड ओपन मुझे काफी रोमांचित करती हैं। आपके थियेटर के क्या हाल हैं। आप हिंदी में काम नहीं करते? ऐसी बात नहीं है। पर मराठी में बहुत पारिवारिक हूं। मराठी में मेरे सारे नाटक बहुत सराहे गए हैं। सावित्री, महासागर, खंदोबाचे लागीन, स्वप्न गाने संपल और मेरा नाटक धियानी मानी तो अभी भी चल रहे हैं। ऐसा क्या है जो आपने अभिनय को ही करिअर बनाया? मैंने बचपन में कभी अभिनय के बारे में नहीं सोचा था। पर मैं मानता था कि हर मराठी एक अभिनेता होता है। इसलिए जब भी मैं टीवी या फिल्में देखता था तो सोचता था कि यह तो मैं भी कर सकता हूं और एक समय ऐसा आया कि मैं अभिनय करने लगा। इसकी तैयारी कहां हो गई? मैं जब छोटा था तो गणेश उत्सव के दौरान कुछ अभिनय करता था। लेकिन एक दिन जब मेरा एक दोस्त मुझे एक मराठी नाटक दिखाने ले गया तो मेरा रास्ता बदल गया। उस नाटक में काम करने वाला एक आदमी अचानक नहीं आया तो मेरे दोस्त ने कहा कि तुम कर लो। मराठी नाटकों के नामी निर्देशक बाल धूरी वहां चीफ गेस्ट थे। बस संगीत वर्दान नाम के उस नाटक ने मेरी किस्मत ही बदल दी। द्बकुछ फिल्में आने वाली हैं जिनमें महेश की नग्न : द नेक्ड ट्रूथ शामिल है। यह आदमी की भीतरी हिंसा पर आधारित है। इसके अलावा सीआईडी से फुरसत नहीं मिल रही है।

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