महिलाओं के प्रवेश का फैसला अंतिम नहीं

नयी दिल्ली, 5 दिसंबर (एजेंसी) सुप्रीमकोर्ट ने बृहस्पतिवार को कहा कि केरल के सबरीमाला मंदिर में सभी आयु वर्ग की महिलाओं को प्रवेश की अनुमति देने संबंधी 2018 का फैसला अंतिम नहीं है, क्योंकि इस मामले को वृहद पीठ को सौंप दिया गया है। शीर्ष अदालत ने यह टिप्पणी उस वक्त की जब भगवान अयप्पा की एक महिला श्रद्धालु बिन्दु अमीनी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता इन्दिरा जयसिंह ने 2018 के फैसले के उल्लंघन का आरोप लगाया। उनहोंने कहा कि सबरीमाला मंदिर में प्रवेश का प्रयास करने वाली उनकी मुवक्किल पर हमला किया गया है। चीफ जस्टिस एसए बोबडे की अध्यक्षता वाली पीठ ने संविधान पीठ के 14 नवंबर के फैसले का जिक्र करते हुये कहा कि 2018 का निर्णय अंतिम शब्द नहीं है, क्योंकि यह मामला 7 सदस्यीय पीठ के पास विचार के लिये भेजा गया है। जयसिंह ने कहा कि शीर्ष अदालत के फैसले के बावजूद उनकी मुवक्किल पर हमला किया गया था। पीठ इस महिला श्रद्धालु के आवेदन पर अगले सप्ताह सुनवाई के लिये सूचीबद्ध करने पर तैयार हो गयी। ‘हम अगले सप्ताह अन्य याचिका के साथ इसे सूचीबद्ध करेंगे।’ एक अन्य महिला फातिमा ने भी शीर्ष अदालत में इसी तरह के अनुरोध के साथ बुधवार को याचिका दायर की है।

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