बासमती कोर्ट की चौखट पर खास होगा लंगड़ा आम

खुशबूदार बासमती चावल की लड़ाई लंबी हो चली है। मामला है विशेष दर्जा यानी जीआई टैग का। असल में कुछ राज्यों में उपजाये जाने वाले चावल बासमती को तो जीआई टैग मिल गया है, लेकिन मध्य प्रदेश इस लड़ाई में एक जगह पिछड़ गया, अब वह बासमती चावल के लिए सुप्रीम कोर्ट की चौखट पर गया है। उधर, स्वाद में जो ‘लंगड़ा आम’ आपको लुभाता है, अब वह ओहदे में भी खास हो जाएगा। बता दें कि रसगुल्ले पर तो पहले लड़ाई छिड़ ही चुकी है, अभी ऐसी कई चीजें हैं जिनका लुत्फ तो हम-आप उठाते हैं, लेकिन उन्हें विशेष दर्जा दिलाने की जद्दोजहद चल रही है। हम बात कर रहे हैं ज्योग्राफिकल इंडिकेशन (जीआई) टैग हासिल करने की। आपको बताते हैं कि जीआई टैग होता क्या है? जीआई टैग उन उत्पादों को दिया जाता है जो किसी क्षेत्र विशेष में पैदा होते हैं। इन उत्पादों की खासियत और प्रतिष्ठा उस क्षेत्र विशेष में पैदा होने की वजह से स्थापित होती है। यह टैग मिलने के बाद संबंधित उत्पाद का नाम लेकर बाजार में किसी और चीज को बेचने पर पाबंदी लग जाती है। कुछ खास जीआई टैग वाली चीजें जैसे दार्जिलिंग की चाय, मलिहाबादी आम, बनारस की साड़ी वगैरह-वगैरह। इस टैग के बाद इनको एक्सपोर्ट करने से भी अच्छा मुनाफा कमाया जा सकता है। जीआई टैग एक लंबी प्रक्रिया के बाद मिलता है। असल में पूरी दुनिया में मशहूर मलीहाबादी दशहरी के बाद अब सीआईएसएच ने बनारसी लंगड़ा, चौसा तथा रटौल किस्मों के आम के लिए भी जीआई टैग हासिल करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। यह टैग मिल जाने से आम की इन किस्मों के उत्पादकों को अपनी फसल के बेहतर दाम मिलने की संभावना बढ़ेगी। यहां उल्लेखनीय है कि बेहद मिठास वाले दशहरी आम को सितंबर 2009 में जीआई टैग मिला था। आम की अन्य किस्मों, मसलन रत्नागिरी का अल्फांसो, गीर और मराठवाड़ा का केसर, आंध्र प्रदेश का बंगनापल्ली, भागलपुर का जर्दालू, कर्नाटक का अप्पामिडी और मालदा का हिमसागर भी जीआई टैग वाले हैं। खास किस्म और जगह विशेष के नाम पर टैग की लड़ाई बासमती चावल को लेकर भी रही है। यूं तो अभी बासमती चावल पर पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और जम्मू-कश्मीर के कुछ हिस्सों का अधिकार है, लेकिन ताजा मामला मध्य प्रदेश को लेकर है। मध्य प्रदेश सरकार अपने यहां के बासमती चावल को जीआई टैग दिलाने के लिए सुप्रीम कोर्ट की चौखट पर जा चुकी है। असल में इसी साल फरवरी में मद्रास हाईकोर्ट ने मध्य प्रदेश के बासमती चावल को जीआई टैग से बाहर कर दिया था। इसी के खिलाफ राज्य सरकार शीर्ष अदालत गयी है। रसगुल्ले पर भी हुई थी लड़ाई बच्चों की एक कविता है, ‘चुन्नू-मुन्नू जुड़वां भाई, रसगुल्ले पर हुई लड़ाई,’ वैसे हम यहां दो राज्यों के बीच हुई लड़ाई का जिक्र कर रहे हैं। असल में पश्चिम बंगाल का दावा था कि रसगुल्ला मूलत: उनका है, जबकि ओडिशा का दावा था कि रसगुल्लों पर जीआई टैग उसे मिलना चाहिए। दोनों राज्यों ने अपने-अपने दावे को लेकर कई तर्क दिए। पश्चिम बंगाल ने सबसे पहले रसगुल्ला बनाये जाने का तर्क दिया तो ओडिशा ने कहा कि प्रसाद के तौर पर उसके यहां रसगुल्ला बनता था। बाद में इसके लिए कमेटी गठित की गयी। लंबी लड़ाई के बाद आखिरकार रसगुल्ला बंगाल के नाम हुआ। - फीचर डेस्क

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